प्रतीक चौहान. रायपुर. बीरगांव के डेरा पारा बस्ती में रहकर नशे की लत ने विक्की उइके की जिंदगी खराब कर दी थीं. लेकिन कहते है न कि जीवन में एक अच्छी संगत मिल जाए तो दोस्त बेड़ा पार लगा देते है… ऐसा ही कुछ हुआ विक्की के साथ. पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी आई और इसी बीच उसके जीवन में बतौर दोस्त और कोच दीपक सिंह की एंट्री होती है. दीपक राजधानी रायपुर के भनपुरी में अपना एक जिम संचालित करते हैं. बातों ही बातों में विक्की ने उन्हें बताया कि उसे भी बॉडी बनानी है. तो उसके कोच और दोस्त यानी दीपक सिंह ने उन्हें सबसे पहले नशा छोड़ने की प्रॉमिस ली.


विक्की ने अपना प्रॉमिस निभाया और हर प्रकार के नशे से खुद को दूर किया. फिर घर की जिम्मेदारी निभाने के लिए डिलीवरी बॉय का काम शुरू किया और वे Zomato में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक काम करते है. इसी बीच अपने कोच को वेटलिफ्टिंग में दूसरे राज्यों में जाकर खेलता देख उनके मन में भी ये ख्याल आया कि वो भी वेटलिफ्टर बनना चाहते है. बस फिर क्या था… यहां से बतौर एक खिलाड़ी की इस खेल में शुरूआत होती है और आज इस वेटलिफ्टर ने अपने नाम कई नेशनल रिकार्ड जीते है और अब उन्होंने एक वर्ल्ड रिकार्ड बनाने की ठानी है.
उनके कोच बताते है कि 66 किलोग्राम वर्ग में 318.5 किलो वजन का डेडलिफ्टिंग वर्ल्ड रिकार्ड है और वे वर्तमान में चंद महीनों की ट्रेनिंग के बाद ही 270 किलो डेडलिफ्ट आसानी से कर लते है. हैरानी की बात ये है कि यहां जब लोगों के पास 24 घंटे का समय भी कम पड़ता है, ऐसे में वे सुबह 6 बजे उठकर 9 बजे तक जिम करते है. फिर 10 बजे से शाम 6 बजे तक डिलीवरी बॉय का काम कर अपनी घर की जिम्मेदारी निभाते है और फिर शाम के वक्त वे जिम ज्वाईन करते है और 10 बजे से 12 बजे तक वे अपने वर्ल्ड रिकार्ड बनाने को लेकर प्रैक्टिस करते है. कोच बताते है कि विक्की ने अब तक 16 राज्यों में वेटलिफ्टिंग में मेडल जीते है. विक्की अपने पिता को याद कर के भावुक हो जाते है, लेकिन साथ में ये भी कहते है कि वे वर्ल्ड रिकार्ड बनाकर अपने पिता और अपने परिवार का नाम जल्द रौशन करेंगे.
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