Dharm Desk – ज्योतिष शास्त्र और भारतीय परंपराओं में हमारे खानपान और जीवनशैली का सीधा असर ग्रहों की दशा और हमारी सेहत से जोड़ा गया है। बहुत बार देखा जाता है कि जब व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति कमज़ोर या खराब होती है। तो उसे स्वास्थ्य से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।यदि आप भी स्वास्थ्य समस्याओं या खराब मंगल के प्रभावों से परेशान है तो एक बहुत ही साधारण और आसान उपाय अपनाकर इस समस्या से राहत पा सकते हैं? मंगल ग्रह कितना भी खराब क्यों न हो केवल अपनी बैठने की शैली और खान-पान के तरीके में थोड़ा सा बदलाव करने से स्वास्थ्य में अकल्पनीय सुधार देखा जा सकता है। प्राचीन परंपरा के अनुसार पृथ्वी को तत्त्व रूप में मंगल और भूमि पुत्र कहा जाता है। जब ज़मीन पर बैठकर भोजन करते हैं। तो सीधा संपर्क धरती से होता है। इससे कुंडली में खराब मंगल का नकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए आज से भोजन टेबल छोड़कर ज़मीन पर बैठकर भोजन करने की इस पारंपरिक और लाभकारी आदत को अपनाएं।

जमीन पर बैठकर खाने के फायदे और मंगल दोष से राहत

1.शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद

यदि किसी मनुष्य को डायबिटीज या शुगर
की समस्या है। तो ज़मीन पर बैठकर खाना खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म सुधरता है। यह आदत रक्त में शर्करा के स्तर को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में काफी मददगार साबित होती है।

2.इंसुलिन का प्राकृतिक निर्माण:

जब ज़मीन पर आलथी पालथी सुखासन मारकर बैठते हैं। तो शरीर की पाचन प्रणाली और अग्न्याशय पर सकारात्मक दबाव पड़ता है। इससे शरीर में प्राकृतिक रूप से इंसुलिन का निर्माण होना शुरू हो जाता है। जिससे डायबिटीज के रोगियों को लाभ मिलता है।

3.बेहतर पाचन के लिए उपयोगी

ज़मीन पर बैठकर खाते समय हम भोजन करने के लिए थोड़ा आगे झुकते हैं और फिर सीधा बैठते हैं। यह प्रक्रिया एक प्राकृतिक योग की तरह काम करती है। इससे पेट के पाचक रस ज्यादा कार्यशील होते हैं और भोजन जल्दी व आसानी से पचता है।

4.रक्त प्रवाह और हृदय की सेहत पर असर

कुर्सी या भोजन की टेबल पर बैठने की तुलना में ज़मीन पर बैठने से हृदय की ओर रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। इससे दिल पर कम दबाव पड़ता है और पाचन अंगों तक पोषण सही तरीके से पहुचता है।

5. प्राकृतिक जुड़ाव

जमीन पर बैठना हमें धरती की ऊर्जा से जोड़ता है। जिससे शरीर का संतुलन बना रहता है।यह मुद्रा मन को शांत करने और मानसिक तनाव को कम करने में भी मदद करती है।