Dharm Desk :- मां दुर्गा के देशभर में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनकी पूजा परंपराएं उन्हें दूसरे शक्तिस्थलों से अलग पहचान देती है। बिहार के आमी मंदिर की धार्मिक विशेषता भी कुछ ऐसी ही है। यहां माता के पिंडी स्वरूप की पूजा की जाती है, जबकि मंदिर परिसर में स्थित यज्ञ कुंड श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है । इस मंदिर की मान्यता राजा दक्ष के यज्ञ और माता सती की पौराणिक कथा से जुड़ी हुई है। यही वहज है कि नवरात्र के दिनों में इस दरबार का विशेष धार्मिक महत्व रहता है। माता के दर्शन के साथ ही भक्त यहां की प्राचीन और यज्ञ कुंड से जुड़ी मान्यताओं के बारे में जानने के लिए भी उत्सुक रहते हैं।
साती ने यहां यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्यागे
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष प्रजापति ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। अपने पति का अपमान देखbकर माता सती अत्यंत दुखी हुईं। उन्होंने यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए। इस घटना के बाद भगवान शिव क्रोधित हो उठे। माता सती के इसी प्रसंग से देशभर के कई धार्मिक स्थलों की मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। आमी मंदिर को भी स्थानीय परंपरा में इसी कथा से जोड़ कर देखा जाता है। इस कारण ये स्थल देवी उपासकों के लिए विशेष श्रद्धा रखत है।
पिंडी स्वरूप और यज्ञ कुंड की होती है पूजा
आमी मंदिर की प्रमुख विशेषता यहां की पूजा परंपरा और माता के पिंडी स्वरूप की आराधना है। मंदिर परिसर में स्थित यज्ञ कुंड भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यज्ञ कुंड में जल या दूध अर्पित करने पर वह दिखाई देना बंद हो जाता है। भक्त इसे देवी की महिमा से जोड़कर देखते है।
शारदीय नवरात्र में लगता विशाल मेला
शारदीय नवरात्र के दौरान आमी मंदिर में देवी आराधना के लिएलाखों भक्त पहुंचे। मंदिर परिसर में पूजा-पाठ, मंत्रोच्चार और दुर्गा सप्तशती के पाठ से भक्तिमय वातावरण बनता है। या नवरात्रि पर विशाल मेला लगता है या दूर-दूर से लोग आते हैं।

कहां स्थित है आमी मंदिर
आमी मंदिर बिहार के सारण जिले के दिघवारा प्रखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के किनारे स्थित है। सड़क मार्ग से यहां पहुंचा जा सकता है। मंदिर की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु नजदीकी रेलवे स्टेशन और स्थानीय परिवहन की सुविधा के आधार पर अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं।

