प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में अब रिस्क लेने वालों को सम्मान मिलता है और स्टार्टअप्स को मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए, जिससे भारत ‘मेड इन इंडिया’ को वैश्विक उत्कृष्टता का प्रतीक बना सके और आत्मनिर्भरता बढ़ा सके, खासकर “स्टार्टअप इंडिया” के एक दशक पूरे होने के अवसर पर उन्होंने जोर दिया कि युवा अब नौकरियों के बजाय नौकरी देने वाले बन रहे हैं, और देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। आज के वक्त में स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन रहे हैं, आईपीओ ला रहे हैं, नौकरियां पैदा हो रही हैं. पिछले ही साल करीब 44 हजार नए स्टार्टअप रजिस्टर हुए हैं. स्टार्टअप इंडिया शुरू होने के बाद किसी साल में ये एक साल में सबसे बड़ा जंप है.
भारत मंडपम में ‘स्टार्टअप पे चर्चा’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया ने युवाओं को खुला आसमान दिया है. 10 साल में स्टार्टअप 500 से बढ़कर 2 लाख से ज्यादा हो गए और यूनिकॉर्न 125 के करीब पहुंच गए. आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप ईकोसिस्टम है
भारत मंडपम में ‘स्टार्टअप पे चर्चा’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स की तारीफ की. उन्होंने कहा कि युवाओं के आइडिया से बहुत सारी प्रॉब्लम सॉल्व हो रही हैं. हमने स्टार्टअप इंडिया शुरू किया, युवाओं को खुला आसमान दिया और आज युवाओं ने एक से बढ़कर एक स्टार्टअप शुरू कर दिए हैं. आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ स्टार्टअप ईकोसिस्टम है.
10 साल पहले देश में 500 से भी कम स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या आज 2 लाख से भी ज्यादा हो गी है. 2014 में भारत में सिर्फ 4 यूनिकॉर्न थे आज भारत में करीब 125 एक्टिव यूनिकॉर्न हैं. दुनिया ये सब देखकर हैरान है. जब भारत की स्टार्टअप जर्नी की बात होगी तो आज के युवा एक ब्राइट केस स्टडी बनने वाले हैं.
पीएम मोदी के संबोधन से साफ है कि स्टार्टअप इंडिया सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि सोच में बदलाव है. रिस्क लेने की संस्कृति, टियर-2/3 शहरों से उभरते आइडिया, इनोवेशन-सपोर्ट सिस्टम और फंडिंग ने भारत को वैश्विक स्टार्टअप पावरहाउस बनाया है. अब अगला फोकस एआई और मैन्युफैक्चरिंग पर है- जहां भारत नेतृत्व कर सकता है. वह है स्टार्टअप स्पिरिट. मेरे देश का नौजवान आज कंफर्ट जोन में अपनी जिंदगी गुजरने को तैयार नहीं है. वह अपने लिए नए रास्ते खुद बनाना चाहता है.
जो देश एआई में जितना आगे होगा, वह देश उतना ही बड़ा फायदा होगा. भारत के लिए यह काम स्टार्टअप्स को करना होगा. फरवरी में भारत में एआई की एक समित हो रही है. इंडिया एआई मिशन के जरिए हम कई सॉल्यूशन दे रहे हैं. अब छोटे स्टार्टअप्स के लिए भी बड़ी टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराने की कोशिश है. आज रिस्क टेकिंग आइडिया फैशन बन रहा है. मैं रिस्क टेकिंग पर जोर देता रहा हूं, क्योंकि यह मेरी भी पुरानी आदत है. जो काम कोई करने को तैयार नहीं होता, मैं वो करता हूं. किसी ना किसी को तो रिस्क लेना होगा, नुकसान होगा तो मेरा होगा, फायदा होगा तो देश के करोड़ों लोगों का फायदा होगा.
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