हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए नगर निगम की टीम नियमित रूप से सड़कों पर लगने वाले ठेलों को हटाने पहुंचती है। लेकिन जब इसी कार्रवाई के दौरान जनप्रतिनिधि ही विरोध में उतर आएं, तो व्यवस्था कैसे सुधरेगी? इंदौर के पालदा क्षेत्र में नेमावर रोड पर कुछ ऐसा ही मामला सामने आया, जहां सड़क पर ठेले लगाकर कारोबार किया जा रहा था। इन ठेलों के कारण यातायात बाधित हो रहा था। इसी स्थिति को व्यवस्थित करने के लिए नगर निगम की रिमूवल टीम मौके पर पहुंची थी। यह कोई विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान नहीं, बल्कि सड़क पर यातायात बाधित कर रहे ठेलों को हटाने की नियमित कार्रवाई थी।

नियमित कार्रवाई का विरोध क्यों किया गया?

आरोप है कि वार्ड 75 के कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी ने इस कार्रवाई का विरोध किया। निगम की टीम के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई और ठेले छुड़ाने के लिए पार्षद निगम की गाड़ी के सामने धरने पर बैठ गए। इतना ही नहीं, आरोप है कि ठेले वालों और रहवासियों को भी गाड़ी के सामने बैठाया गया, ताकि निगम की टीम अपनी कार्रवाई आगे न बढ़ा सके। अब सवाल यह है कि जब सड़क पर ठेले लगाकर कारोबार किया जा रहा था और उनसे यातायात प्रभावित हो रहा था, तब नियमित कार्रवाई का विरोध क्यों किया गया? क्या आम लोगों को सड़क पर बिना बाधा आवाजाही का अधिकार नहीं है? और क्या किसी जनप्रतिनिधि को अपनी मांग मनवाने के लिए सरकारी अमले की कार्रवाई रोकने का अधिकार है?

सड़क पर ठेले, यातायात बाधित

पालदा क्षेत्र के नेमावर रोड पर सड़क पर ही ठेले लगाकर व्यापार किया जा रहा था। इन ठेलों के कारण सड़क पर आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बन रही थी। इसी समस्या को देखते हुए नगर निगम की टीम नियमित कार्रवाई के तहत मौके पर पहुंची और सड़क पर लगे ठेलों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की।लेकिन कार्रवाई के दौरान वार्ड 75 के कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी सामने आ गए। आरोप है कि उन्होंने निगम की टीम को कार्रवाई करने से रोकने की कोशिश की और कर्मचारियों के साथ अभद्रता की।

विवाद खड़ा होना कई सवाल पैदा करता

यहां सवाल बेहद सीधा है। जब ठेले सड़क पर लगाकर कारोबार किया जा रहा हो और इससे यातायात प्रभावित हो रहा हो, तो सड़क को खाली कराने की कार्रवाई का विरोध किस आधार पर किया जा रहा था? नगर निगम की जिम्मेदारी है कि सड़कों पर यातायात सुचारु रहे। वहीं, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कराएं। ऐसे में नियमित कार्रवाई के दौरान विवाद खड़ा होना कई सवाल पैदा करता है।

ठेले छुड़ाने धरने पर बैठे पार्षद!

मामले में सबसे ज्यादा चर्चा पार्षद कुणाल सोलंकी के विरोध के तरीके को लेकर हो रही है। आरोप है कि जब निगम की टीम ने सड़क पर लगे ठेलों को हटाने की कार्रवाई की, तो पार्षद जब्त किए गए ठेलों को छुड़ाने की मांग करने लगे।इसके बाद पार्षद निगम की गाड़ी के सामने बैठकर धरना देने लगे। यह भी आरोप है कि ठेले वालों और रहवासियों को निगम की गाड़ी के सामने बैठाया गया, जिससे कार्रवाई रोकने की कोशिश की गई।अब सवाल यह है कि सड़क पर यातायात बाधित होने की समस्या का समाधान आखिर इस तरीके से कैसे निकलेगा? यदि ठेले सड़क पर लगने के कारण लोगों के आवागमन में परेशानी पैदा कर रहे थे, तो उन्हें हटाने की नियमित कार्रवाई में सहयोग किया जाना चाहिए था।

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