पटना। ​बिहार की राजनीति में इन दिनों जनसुराज पार्टी की गतिविधियां लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। इसी बीच, आगामी एमएलसी चुनावों को लेकर पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जनसुराज द्वारा घोषित उम्मीदवार भूषण झा ने महज कुछ ही घंटों के भीतर अपना टिकट वापस कर दिया। पार्टी के इस फैसले और अंदरूनी कामकाज पर सवाल उठाते हुए उन्होंने अब निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद पार्टी ने तुरंत कदम उठाते हुए श्यामनंदन यादव को इस सीट से अपना नया उम्मीदवार घोषित कर दिया है

​भूषण झा का टिकट वापसी और गंभीर आरोप

​गुरुवार को जनसुराज ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए भूषण झा को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था। लेकिन शुक्रवार को मुजफ्फरपुर के एक निजी होटल में पार्टी संस्थापक प्रशांत किशोर की मौजूदगी में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक के बाद ही राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए।
​बैठक के दौरान उपजे विवाद के बाद भूषण झा ने पार्टी से नाता तोड़ते हुए टिकट लौटा दिया। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने पार्टी नेतृत्व और वहां मौजूद कार्यकर्ताओं के व्यवहार पर गहरी नाराजगी जताई। झा ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपनी बात रखनी शुरू की, तो उनके साथ आए शिक्षक साथियों को वीडियो रिकॉर्डिंग करने से रोक दिया गया। साथ ही, उनकी बात को मीडिया तक पहुंचने से भी बाधित किया गया।

​वही बोलें जो पीके ने कहा है का दबाव

​भूषण झा ने आगे खुलासा किया कि उन पर पार्टी की ओर से यह दबाव बनाया जा रहा था कि वे केवल वही बातें बोलें जो प्रशांत किशोर द्वारा तय की गई हैं। उन्होंने कहा कि बैठक का माहौल और कार्यकर्ताओं का रवैया बेहद आपत्तिजनक था, जिसके कारण उनके साथ आए शिक्षक साथी भी असहज महसूस करने लगे। अपनी स्वतंत्रता और स्वाभिमान का हवाला देते हुए उन्होंने जनसुराज से अलग होने और जनता के बीच जाकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया।

​श्यामनंदन यादव को मिला नया टिकट

​इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद जनसुराज ने बिना देर किए डैमेज कंट्रोल किया। पार्टी ने पटना में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नए उम्मीदवार के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया। अब पार्टी की तरफ से श्यामनंदन यादव इस सीट पर जनसुराज के नए चेहरे होंगे। देखना यह होगा कि इस बदलाव के बाद जनसुराज पार्टी इस शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी पकड़ कितनी मजबूत रख पाती है।