Dharm Desk – विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। इस दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय का स्मरण किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह पर्व नई शुरुआत, साहस और शुभ कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है। विजयादशमी का पर्व इस बार 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन शस्त्र पूजन के साथ शमी के वृक्ष की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि इस दिन शमी पूजन करने और भगवान शिव को शमी पत्र अर्पित करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

शमी के वृक्ष की पूजा क्यों है खास?

सनातन परंपरा में शमी के पेड़ को पूजनीय माना गया है। इसका संबंध भगवान शिव की पूजा और शनिदेव से भी जोड़ा है। विजयादशमी के अवसर पर शमी पेड़ की पूजा कर परिवार की सुख-शांति और जीवन में सफलता की प्रार्थना की जाती है। महाभारत से जुड़ा एक प्रसंग भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी पेड़ में छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद उन्होंने इसी पे्रड़ से अपने शस्त्र प्राप्त किए थे। इस प्रसंग के कारण शमी को विजय, साहस और सफलता का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी पर शमी की पूजन की परंपरा इसी धार्मिक महत्व से जुड़ी हुई है।

महादेव को शमी का पत्ता चढ़ाने की क्या है मान्यता?

भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र के साथ शमी पत्र अर्पित करना शुभ और मान्यता पूरी करने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महादेव को श्रद्धापूर्वक शमी का पत्ता चढ़ाने से भक्त को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। विजयादशमी के दिन भी श्रद्धालु शमी पत्र अर्पित कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। लोक मान्यताओं है कि दशहरे के दिन महादेव को शमी का एक पत्ता अर्पित करना शुभ फल देने वाला होता है। इसे आर्थिक परेशानियों से मुक्ति, घर में खुशहाली और जीवन में उन्नति की प्रार्थना से जोड़कर देखा जाता है।

विजयादशमी पर कैसे करें शमी पत्र अर्पित?

विजयादशमी के दिन स्नान के बाद भगवान शिव का स्मरण करें। इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित कर पूजा करें। श्रद्धापूर्वक शमी पत्र अर्पित करते हुए परिवार के कल्याण, सुख-समृद्धि और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। पूजा के दौरान मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।