पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से जंग रोकने के लिए 3 आतंकवादियों को शांतिदूत बनाकर काबुल भेजा है. इन तीनों ही आतंकियों का नाम है- फजलुर रहमान खलील, अब्दुल्ला शाह मजहर (पीर मजहर शाह) और कारी साजिद उस्मान. पाकिस्तान ने तीनों को ही तालिबान के नेता से बात करने के लिए भेजा है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि नहीं की है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि ये सभी धार्मिक नेता हैं. इनके बारे में ज्यादा जानकारी हम नहीं दे सकते हैं. ऊर्दू मीडिया ने सूत्रों के हवाले से लिखा है- फजलुर, मजहर और उस्मान 2 दिन से काबुल में बैठे हैं. तीनों पहले पीओके में सक्रिय थे. इन तीनों को ही ऐसे वक्त में काबुल भेजा गया है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग जारी है.
पाकिस्तान ने 3 आतंकियों को शांतिदूत बनाकर काबुल भेजा है. तीनों आतंकियों का नाम है- फजलुर रहमान खलील, अब्दुल्ला शाह मजहर (पीर मजहर शाह) और कारी साजिद उस्मान. तीनों का काम तालिबान के सुप्रीम लीडर से एक फतवा जारी कराना है, जिससे तुरंत युद्ध रुक जाए.
फजलुर रहमान खलील- पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय रहा है. 1980 के दशक में हरकत-उल मुजाहिद्दीन का प्रमुख बनाया गया था. तालिबान के लड़ाकों के साथ खलील के अच्छे संबंध रहे हैं. खलील मूल रूप से खैबर पख्तूनख्वाह का रहने वाला है. एक वक्त में फजलुर रहमान को कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन का राइट हैंड माना जाता था. वर्तमान में खलील पीओके के 2 मदरसों का प्रमुख है, जहां पर आतंकियों को ट्रेंड किया जाता है.
अब्दुल्ला शाह मजहर- काबुल में शांतिदूत बनकर गए अब्दुल्ला को जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का करीबी माना जाता है. अब्दुल्ला वर्तमान में तहरीक-ए-गल्बा-ए-इस्लाम नामक एक पार्टी के प्रमुख पद पर काबिज है. अब्दुल्ला की पकड़ तालिबान के भीतर है. इसलिए उसे शांतिदूत बनाकर भेजा गया है.
कारी साजिद उस्मान- कारी उस्मान अपने भाई साजिद की देखरेख में आतंकी बना. साजिद ने तालिबान के लिए सोवियत संघ के खिलाफ जिहाद अभियान का नेतृत्व किया था. कारी उस्मान पाकिस्तान के साथ-साथ सऊदी और अफगानिस्तान में रहता है. पुराने रिश्तों का हवाला देकर उसे भी काबुल भेजा गया है.
पाकिस्तान की सरकार चाहती है कि तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंजदा एक फतवा जारी करें, जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ आतंकी गतिविधियों पर बैन की बात हो. तालिबान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है. तालिबान का कहना है कि आतंकवाद पाकिस्तान का घरेलू मामला है. पाकिस्तान की कोशिश किसी भी तरह से युद्ध रुकवाने की है. क्योंकि, उसके पड़ोसी देश ईरान में पहले से जंग जारी है.
पाकिस्तान की सरकार चीन, कतर, सऊदी और तुर्की के सहयोग से तालिबान की सरकार से बात कर रही थी, लेकिन दोनों के बीच सीजफायर पर बात नहीं बन पा रही है. इन्हीं कारणों से अब पाकिस्तान की सरकार ने 3 आतंकियों को शांतिदूत बनाकर भेजा है.
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