Dharam Desk :- आज वामन जयंती मनाई जा रही है। भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को मनाए जाने वाले इस पर्व का भगवान विष्णु के वामन अवतार से विशेष संबंध है। राजस्थान के नागौर जिले में स्थित जुंजाला धाम इसी वहज से श्रद्धालुओं के लिए खास आस्था का केंद्र है। यहां श्री गुसाईं जी महाराज मंदिर के गर्भगृह में शिला पर भगवान वामन के पदचिह्न मौजूद है। श्रद्धालु इन चरण चिह्नों के दर्शन और पूजन के लिए यहां पहुंचते हैं।
राम सरोवर के पास पड़ा था वामन भगवान का चरण
जुंजाला धाम नागौर जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर अजमेर-नागौर मार्ग पर स्थित है। ऐसा कहा जाता है, जब भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी और बाद में विराट रूप धारण कर तीनों लोक नापे, तब उनका एक चरण जुंजाला के राम सरोवर के पास पड़ा था। इसी मान्यता के चलते मौजूद पदचिह्नों को भगवान वामन के चरणों से जोड़कर श्रद्धा के साथ पूजा जाता है।
घर बैठे भी कर सकते हैं तीन पग की मान्यता
वामन जयंती पर जुंजाला धाम जाना संभव न हो तो घर पर भी श्रद्धा के साथ तीन पग की मान्यता की जा सकती है। इसके लिए भगवान विष्णु या वामन देव का स्मरण करके घर में शुद्ध स्थान पर तीन पग चलने की मान्यता की जाती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार 3 कदम चलकर भगवान वामन को प्रणाम कर सकते है और मनोकामना की प्रार्थना कर सकते हैं। इसके बाद मान्यता पूरी होने पर दर्शन करने के लिए जाते हैं।

इसलिए हुआ था वामन अवतार
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा बलि ने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। देवताओं की स्थिति देखकर माता अदिति ने भगवान विष्णु की आराधना की। इसके बाद भगवान विष्णु ने उनके पुत्र के रूप में वामन अवतर लिया। वामन देव राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे। उनसे तीन पग भूमि मांगी। बलि के वचन देने के बाद भगवान ने विराट रूप धारण किया। दो पग में पृथ्वी और स्वर्ग को नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान न बचने पर राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान ने तीसरा पग उनके सिर पर रखा। उन्हें पाताल लोक का स्वामी बना दिया।जुंजाला धाम में भगवान वामन के चरण चिह्नों की यही मान्यता इस स्थान को वामन जयंती पर विशेष बना देती है ।



