चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को उत्तर भारत में जहां भारतीय नववर्ष मनाया जाता है, वहीं दक्षिण भारत में इस दिन उगादी का त्योहार मनाया जाता है. यह पर्व आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में विशेष रूप से मनाया जाता है. इसी दिन चैत्र नवरात्रि और मराठियों का नववर्ष गुड़ी पड़वा का भी शुभारंभ होगा.

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला उगाही उत्सव प्रकृति के श्रृंगार और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है. इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी. इसे ‘युगादि’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है युग की शुरुआत. मान्यता है कि इसी दिन से समय की गणना शुरू हुई थी.
शुभ मुहूर्त
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 20 मार्च को शाम 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर यह पर्व 19 मार्च को ही मनाया जाएगा. नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विशेष महत्व होता है. घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 8 बजकर 8 मिनट तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से 1 बजकर 11 मिनट तक रहेगा.
गुड़ी बांधने का शुभ मुहूर्त
गुड़ी पड़वा महाराष्ट्र में हिंदू नववर्ष के रूप में मनाया जाता है. इस दिन गुड़ी बांधने और ध्वज फहराने का समय सुबह 5 बजकर 15 मिनट से 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. लोग घरों को सजाते हैं, रंगोली बनाते हैं और विभिन्न पकवान तैयार करते हैं. यह दिन नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.
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