कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। Gwalior Dust: क्या आप कल्पना कर सकते हैं एक ऐसे शहर की जहां इंसान तो छोड़िए, ठीक से बेजुबान पेड़-पौधे भी सांस नही ले पा रहे हैं। जी हां, मध्यप्रदेश के ग्वालियर में कुछ ऐसा ही हाल है। जिसके चलते इंसानो पर दोहरी मार पड़ रही है।
शहर की सड़कों से उड़ने वाली धूल पेड़-पौधों की पत्तियों पर मोटी परत चढ़ा रही है। इंसान फेसकवर करके, जैसे-तैसे अपना गुजारा कर रहे हैं। लेकिन प्राणवायु यानी ऑक्सीजन देने वाले पेड़ पौधों का हाल बहुत बुरा है। आप सोच रहे होंगे कि भला धूल से पेड़ पौधों और उसके बाद इंसान पर क्या फर्क पड़ेगा। लेकिन जो हकीकत है वह समय से जिम्मेदारों को जगाने का अलार्मिंग अलर्ट है।
शहर में दो दर्जन से अधिक सड़को की जर्जर हालात के कारण बेतहाशा धूल उड़ रही है। खासकर वो सड़कें जहां धूल की समस्या गंभीर है उनमें
सचिन तेंदुलकर मार्ग
डीडी नगर रोड़
ट्रांसपोर्ट नगर रोड
फूलबाग चौराहा रोड़
विक्की फैक्ट्री चौराहा से चंद्रबदनी नाका रोड सहित अन्य इलाके शामिल हैं।
इन इलाकों में उड़ने वाली धूल के कारण इंसानों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। लेकिन बराबरी की परेशानी पेड़-पौधों के लिए भी हो रही है। इन इलाकों में मौजूद डिवाइडर या सड़क किनारे के पेड़ धीरे-धीरे दम तोड़ रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इन पेड़ों की पत्तियों पर धूल की मोटी परत के कारण प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया रुक गयी है और पेड़ भूखे मर रहे हैं और इंसान दोहरी मार झेलने को तैयार क्योंकि यही पेड़ प्राणवायु ऑक्सीजन जनरेट करते हैं।
इस मामले में नगर निगम ग्वालियर के BJP-कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह स्मार्ट सिटी ग्वालियर के लिये गंभीर मामला है। निगम में विपक्षी BJP पार्षद अनिल सांखला का कहना है कि प्रदूषण के मामले में ग्वालियर लगातार पिछड़ रहा है। निर्माण कार्य सड़कों से उड़ने वाली धूल के कारण पेड़ पौधे और पत्तियों पर कई इंच तक धूल जमी हुई है। जिसको साफ करने की जल्द से जल्द जरूरत है। जब तक पेड़ पौधों को एनर्जी नहीं मिलेगी, वे इंसानों को कैसे ऑक्सीजन दे पाएंगे? नगर निगम ने डस्ट फ्री सड़क बनाने के लिए सड़क स्वीपर मशीन खरीदी है, वह भी सड़कों पर चलती हुई नहीं दिख रही है। इस मामलों को लेकर हम गंभीर हैं।
वहीं कांग्रेस से एमआईसी सदस्य मनोज राजपूत का कहना है कि नगर निगम डस्ट फ्री की बात करता है। पेड़ प्रकृति की देन है, इनसे ऑक्सीजन मिलती है, लेकिन उनसे ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है क्योंकि हर पेड़ पर 1 इंच से ज्यादा धूल उनकी पत्तियों पर जम रही है। निगम ने संसाधन भी खरीदे हैं जिनकी कीमत लाखों-करोड़ों में है। ऐसे में निगम को इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इस मामले में नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखा जाएगा। जिसमें इन पेड़ पौधों की धुलाई का जिक्र किया जाएगा। ताकि वह खुलकर सांस ले सकें। वर्तमान हालात को लेकर सिर्फ यही कहा जा सकता है कि शहर के लिए यह दुर्भाग्य की बात है।
ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान का कहना है कि जब भी ठंड का मौसम होता है, दिल्ली के खराब AQI का काफी असर यहां देखने के लिए मिलता है। वर्तमान में भी टेंपरेचर लो है, इसलिए डस्ट पार्टिकल्स एटमॉस्फेयर में अटक जाते हैं। एमकेप की राशि से डस्ट फ्री शहर के लिए काम कर रहे हैं। सड़क किनारे पेवर ब्लॉकिंग का काम किया जा रहा है। फोगर्स का भी उपयोग किया जा रहा है। कंस्ट्रक्शन वर्क के दौरान नियमों का सख्ती से पालन किया जाए, इसको सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बहरहाल खस्ताहाल सड़कों पर वाहनों के शोर के बीच उड़ने वाली धूल हवा को बहुत ज्यादा जहरीला बना रहे। पेड़ ऑक्सीजन के उत्पादक हैं। उनके मरने से CO2 बढ़ेगा,ऑक्सीजन घटेगा। इंसानों पर अस्थमा, फेफड़ों की बीमारियां – दोहरी मार!” दे सकती है। ऐसे में देखना होगा कि आखिर कब तक इस गंभीर समस्या से ग्वालियर को छुटकारा मिलता है।
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