फिर इकठ्ठा हुए आदिवासी: एडसमेटा-सारकेगुड़ा-सिलगेर के दोषियों पर कार्रवाई, मृतक के परिजनों को 1 करोड़ और घायलों को 50-50 लाख मुआवजा देने की मांग

जीवन सिरसान,बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर (Bijapur) जिले के एडसमेटा (Adsameta Naxal Encounter) एनकाउंटर की न्यायिक जांच रिपोर्ट पर फैसला आ चुका है. इसी फैसले के बाद सारकेगुड़ा, सिलगेर और बस्तर में हो रहे नरसंहार के विरोध में बड़ी संख्या में इकठ्ठा हुए आदिवासी दो दिवसीय धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. आदिवासी की मांग है कि दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिजनों को 1 करोड़ और घायलों को 50-50 लाख मुआवजा दिया जाए.

दरअसल बीजापुर के एडसमेटा में 17 मई 2013 को जवानों की गोलीबारी में 8 ग्रामीण मारे गए थे. न्यायिक जांच रिपोर्ट के अनुसार पूरे मुठभेड़ को फर्जी बताया गया है. मूलवासी बचाओ मंच के बैनर तले 3 जिले सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा के करीब 5 हजार ग्रामीण इकट्ठा हो गए हैं. बस्तर संभाग जेल बंदी रिहाई समिति ने भी मूलनिवासी बचाओ मंच को अपना समर्थन दिया है. आदिवासी समाज सेविका सोनी सोरी भी मौजूद है.

ये है आदिवासियों की मांगें

  • एडसमेटा के साथ-साथ सारकेगुड़ा और सिलगेर के दोषियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.
  • पीड़ित परिजनों को सरकारी मुआवजा 1 करोड़ और घायलों को 50-50 लाख रुपए दिया जाना चाहिए.
  • बस्तर में पूर्व हुए नरसंहार को न्याय दिया जाए.
  • इस तरह के नरसंहार पर तत्काल रोक लगाई जाए.
  • दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई कर फांसी की सजा दी जाए.
  • बस्तर के सभी वर्गों के आम नागरिकों को नक्सलियों के नाम पर परेशान करना बंद करें.
  • सरकार खुले मंच पर वार्ता करें और जनता के साथ न्याय करें.

बता दें कि बीजापुर जिले के एडसमेटा में 4 नाबालिग समेत 8 ग्रामीणों की मौत हुई थी. जिसकी जस्टिस वीके अग्रवाल कमेटी ने न्यायिक जांच कर अपना फैसला सुनाया कि मारे गए लोग नक्सली नहीं थे. पूरे 8 लोग आम ग्रामीण थे. 17 मई 2013 को बीज त्यौहार मना रहे थे. पुलिस जवानों की गलत धारणा और घबराहट के चलते यह घटना घटित हुई है. न्यायिक जांच रिपोर्ट के अनुसार पूरी मुठभेड़ फर्जी थी. इस फर्जी मुठभेड़ के दोषियों पर कार्रवाई हो.

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