शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार शाम को बालासाहेब ठाकरे के जन्मशताब्दी वर्ष के मौके पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विरोधियों और पार्टी से अलग हुए बागियों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि ठाकरे परिवार को खत्म करने की कई कोशिशें हुईं, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका. उद्धव ठाकरे ने कहा, “आज बालासाहेब के शताब्दी वर्ष की शुरुआत है. हमारे राजनीतिक सफर में उतार-चढ़ाव आए, लेकिन हमें यह सिखाने की जरूरत नहीं कि मुश्किल हालात में कैसे टिके रहना है. मैंने और राज ने संघर्ष देखा है.”
उन्होंने कहा कि उनके दादा के समय से ठाकरे परिवार की एक गौरवशाली विरासत रही है. कई लोग हमारे नाम को मिटाने आए, लेकिन नाकाम रहे. अगर हमें गद्दारों का अभिशाप न मिला होता, तो महाराष्ट्र का इतिहास और भी गौरवशाली होता. उद्धव ठाकरे ने मुंबई में अपने कार्यकर्ताओं के संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि आपने उन ताकतों को रोका जो ठाकरे नाम को खत्म करना चाहती थीं. यह सिर्फ महाराष्ट्र ही कर सकता है.
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात की है कि बाहरी लोग नहीं, बल्कि अपने ही लोग गद्दार निकले जो हमें खत्म करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं. वोट खरीदे जा सकते हैं, लेकिन आत्मा और जज़्बा नहीं खरीदा जा सकता. आज भी जो जिंदा हैं, वे मेरे साथ हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि बालासाहेब ने महाराष्ट्र को सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि जीने का तरीका सिखाया.
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने सत्ता के सौदों की ओर इशारा करते हुए कहा, “मैं भी उनके साथ जा सकता था, 50 खोखे या उससे ज्यादा ले सकता था. लेकिन तब मैं बालासाहेब का नाम नहीं ले पाता. हम मुट्ठी भर भी रह जाएं, तब भी मैं इन गद्दारों और व्यापारियों के खिलाफ लड़ता रहूंगा.”
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