प्रदीप मालवीय, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्राद्ध पक्ष के पावन अवसर पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला पारंपरिक ‘उमा-सांझी महोत्सव’ 6 से 12 अक्टूबर तक बड़े ही श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। महोत्सव की पूर्व संध्या पर महाकाल मंदिर को देश-विदेश से मंगाए गए विभिन्न प्रजातियों के सुगंधित पुष्पों से अलौकिक रूप से सजाया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों की खुशबू से पूरा महाकाल मंदिर परिसर सराबोर नजर आ रहा है।

7 दिनों तक गूंजेंगे मंत्र 

सात दिवसीय इस धार्मिक महोत्सव के दौरान मंदिर के पुजारी और पुरोहित विधि-विधान से विशेष अनुष्ठान संपन्न कराएंगे। इस दौरान प्राचीन सांझी की शिला पर प्रतिदिन रंग-बिरंगी व आकर्षक रंगोलियां उकेरी जाएंगी। इसके साथ ही भगवान श्री महाकालेश्वर के विभिन्न दिव्य स्वरूपों के मुखौटों का उपयोग कर आकर्षक झांकियां भी सजाई जाएंगी, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

घट स्थापना और वसंत पूजा से शुरुआत 

महोत्सव की आधिकारिक शुरुआत मंगलवार को घट स्थापना के साथ होगी। संध्या आरती के पश्चात 21 वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा पारंपरिक ‘वसंत पूजा’ संपन्न की जाएगी। महोत्सव के दौरान श्री महाकाल महालोक में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा श्री महाकालेश्वर निःशुल्क अन्नक्षेत्र में कन्या पूजन और विशाल कन्या भोज का भी आयोजन रखा गया है।

12 अक्टूबर को निकलेगी उमा माता की सवारी 

महोत्सव का मुख्य आकर्षण 12 अक्टूबर को निकलने वाली उमा माता (माँ पार्वती) की भव्य सवारी होगी। माँ पार्वती की सवारी नगर भ्रमण पर निकलेगी, जहाँ श्रद्धालु जगह-जगह उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के तट पर जवारे विसर्जन के साथ इस सात दिवसीय उमा-सांझी महोत्सव का गरिमामयी समापन होगा।

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