हेमंत शर्मा, इंदौर/उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में शाही मस्जिद से जुड़े विवाद के बीच सोशल मीडिया पर भ्रामक और तथ्यहीन वीडियो वायरल करने वालों पर पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। पुलिस ने ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में पांच सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को गिरफ्तार किया है। पुलिस की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि संवेदनशील मामले में सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

शाही मस्जिद के सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान सोमवार को उज्जैन में तनाव की स्थिति बनी। मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और विरोध के बीच पुलिस पर पथराव की घटना सामने आई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। बाद में दोबारा तनाव बढ़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा।

इसी बीच सोशल मीडिया पर शाही मस्जिद को लेकर कई तरह के वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। पुलिस ने ऐसे वीडियो की निगरानी शुरू की और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक पांच सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को गिरफ्तार किया गया है। 7 एफआईआर के बाद 100 से ज्यादा इंस्टाग्राम अकाउंट ब्लॉक कर दिए गये हैं.

सोशल मीडिया पर अफवाह… पुलिस की नजर

पुलिस ने सोशल मीडिया यूजर्स के लिए साफ एडवाइजरी जारी की है कि किसी भी संवेदनशील मामले से जुड़ी जानकारी को बिना पुष्टि के वायरल न किया जाए। खास तौर पर ऐसे वीडियो या पोस्ट, जिनसे भ्रम पैदा हो या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो, उन्हें शेयर करने से बचने की अपील की गई है। पुलिस का संदेश साफ है—सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा हर वीडियो सच नहीं होता और बिना पुष्टि के किसी वीडियो को आगे बढ़ाना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।

पुलिस पर पथराव… अब एक-एक आरोपी की तलाश

शाही मस्जिद विवाद के दौरान पुलिस पर हुए पथराव के मामले में भी कार्रवाई तेज कर दी गई है। पुलिस ने पथराव और उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान के लिए वीडियो फुटेज और दूसरे साक्ष्यों को खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस के मुताबिक कई लोगों की पहचान की जा चुकी है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उपलब्ध अपडेट में पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने और आरोपियों की पहचान की बात कही है।

पुलिस की कार्रवाई सिर्फ मौके पर मौजूद लोगों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर माहौल बिगाड़ने वाले कंटेंट की भी निगरानी की जा रही है। यानी एक तरफ जमीन पर पथराव करने वालों पर शिकंजा है, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर भी कार्रवाई हो रही है।

रात में सहमति… सुबह कैसे भड़का विवाद?

इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम पहलू यह भी सामने आया है कि रविवार रात प्रशासन और शहर काजी के बीच मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने को लेकर सहमति बनने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद सोमवार सुबह मौके पर भीड़ जमा हुई और देखते ही देखते विरोध पथराव तक पहुंच गया।

सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाया जाना था। प्रशासन की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। बैरिकेडिंग के आसपास विरोध बढ़ा और इसके बाद पुलिस तथा भीड़ के बीच तनाव की स्थिति बनी।

एसपी प्रदीप शर्मा का सख्त संदेश

पूरे मामले को लेकर लल्लूराम डॉट कॉम ने उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा से खास बातचीत की है। एसपी ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री प्रसारित करने वालों और पुलिस पर पथराव करने वालों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट की।

उज्जैन पुलिस अब पूरे घटनाक्रम में दो स्तर पर कार्रवाई कर रही है—एक तरफ कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और पुलिस पर पथराव करने वालों की पहचान कर गिरफ्तारी की जा रही है, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो के जरिए माहौल प्रभावित करने वालों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।

उज्जैन में शाही मस्जिद विवाद के बीच पुलिस का संदेश बेहद साफ है—कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ हो या सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने की कोशिश, दोनों मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी।

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