देहरादून. विधानसभा चुनाव से एक साल पहले धामी सरकार ने मंत्री मंडल का विस्तार किया है, जिसे लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने करारा हमला बोला है. साथ ही सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा, उत्तराखंड में भाजपा सरकार द्वारा कार्यकाल के अंतिम चरण में किया गया मंत्रिमंडल विस्तार कई गंभीर सवाल खड़े करता है. जब बीते चार वर्षों तक अधूरे मंत्रिमंडल के साथ शासन चलाया गया, तब आखिरी वर्ष में अचानक विस्तार की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?

इसे भी पढ़ें- मैंने फैसला किया है कि मैं… आपदा प्रभावितों से मुलाकात करने पहुंचेंगे हरीश रावत, धामी सरकार पर हमला करते हुए किया बड़ा दावा

आगे यशपाल आर्य ने कहा, साल 2022 में पूर्ण बहुमत मिलने के बावजूद सरकार ने तीन मंत्री पद लंबे समय तक खाली रखे. उस समय न तो शासन-प्रशासन की गति बाधित बताई गई और न ही विकास कार्यों में कोई कमी स्वीकार की गई. ऐसे में अब, जब सरकार के कार्यकाल के मात्र कुछ महीने शेष हैं, नए मंत्रियों की नियुक्ति का औचित्य स्पष्ट रूप से संदिग्ध है. यह निर्णय न तो जनहित में प्रतीत होता है और न ही प्रशासनिक आवश्यकता के तहत लिया गया कदम लगता है. बल्कि, यह साफ तौर पर भाजपा के भीतर बढ़ते असंतोष को नियंत्रित करने और गुटबाजी को संतुलित करने का प्रयास दिखता है.

इसे भी पढ़ें- धामी धाकड़ भी हैं और धुरंधर भी… मंच से राजनाथ सिंह ने की सीएम की तारीफ, कहा- इनके नेतृत्व में आगे बढ़ रहा उत्तराखंड

आगे उन्होंने कहा, राज्य पहले ही लगभग 99 हज़ार करोड़ रुपये के भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है. ऐसे में नए मंत्रियों की नियुक्ति से बढ़ने वाला अतिरिक्त खर्च सीधे तौर पर जनता पर बोझ डालने जैसा है. जब संसाधन सीमित हैं, तब इस तरह के निर्णय वित्तीय अनुशासन पर भी प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं. प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि क्या यह विस्तार केवल राजनीतिक समीकरण साधने के लिए किया गया है? क्या सरकार अपने ही नेताओं की नाराज़गी को शांत करने के लिए जनता के पैसे का उपयोग कर रही है? क्या अंतिम समय में लिए गए ऐसे निर्णय वास्तव में प्रदेश के विकास में कोई ठोस योगदान देंगे?यह स्पष्ट है कि भाजपा सरकार जनहित से अधिक अपने आंतरिक संकटों के समाधान में व्यस्त है. उत्तराखंड की जनता अब इस राजनीति को भली-भांति समझ चुकी है और समय आने पर इसका जवाब अवश्य देगी.