देहरादून. भारी बारिश, ओलावृष्टि से, आंधी से धान की फसल बर्बाद हो गई. जिसे लेकर नेता विपक्ष यशपाल आर्य का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि बाजपुर के दर्जनों गांवों में भारी बारिश, ओलावृष्टि से, आंधी से धान की फसल जो पूरी तरह तैयार थी, बर्बाद हो गई है! खेतों में धान का एक दाना भी नहीं है, किसानों की आंखों में आंसू है, बेबसी है! जो आपदा के मानक है, वो आज के इस महंगाई के दौर में बहुत कम है.
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आगे यशपाल आर्य ने कहा कि 17000 रुपए हेक्टेयर मुआवजा देने का प्रावधान रखा गया है और इसमें एक हेक्टेयर में लगभग खर्च आता है. 50-60 हज़ार रुपए, इसकी भरपाई कैसे होगी? जो हमारे खेत है, जो हमारे काश्तकारों की आशा-उम्मीद है, उनके ऊपर सहकारी समितियों का लोन है, बैंक का लोन है, कर्ज है. आज ये चिंता हर परिवार में है कि कैसे हम गुजर-बसर करेंगे!
उन्होंने ये भी कहा कि मेरा मानना है, और मेरा सरकार से अनुरोध है कि बाजपुर के दर्जनों प्रभावित गांवों के लिए विशेष सहायता दी जानी चाहिए, स्पेशल पैकेज मिलना चाहिए. गन्ने की खेती पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, और दूसरी तरफ जो हमारी दालों की खेती है, बिल्कुल नष्ट हो गई है. मेरा मानना है कि सरकार को इसमें गंभीर होना चाहिए और तत्काल सहायता देनी चाहिए! जो घर टूट गए है, खुले आसमान के नीचे जो लोग रह रहे हैं, उनको भी मदद होनी चाहिए.
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यशपाल आर्य ने ये भी कहा कि चिंता इस बात की है कि अब आगे क्या होगा? कर्ज में डूबे किसान आगे क्या करेंगे? फसल बर्बाद हो चुकी है. घर में अन्न का दाना नहीं है और आगे जो खेती होनी है, उसकी कैसे हम व्यवस्था कर पाएंगे, बहुत कर्ज है, बहुत खर्चे हैं, कैसे इसका समाधान होगा, ये सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए.

