लखनऊ। योगी सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जहां कोआर्डिनेटर भर्ती में के दौरान भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। विभागीय छानबीन के दौरान पता चला कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति की गई है। चयनित 69 में से 48 कोर्स कोऑर्डिनेटर शैक्षिक योग्यता पूरी नहीं करते थे। इसके बावजूद सारे नियम कायदे ताक पर रखकर उन्हें दो वर्षों तक मोटी तनख्वाह दी गई। छानबीन के बाद आउटसोर्सिंग कंपनी Avni Paridhi पर FIR की गई है।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि गरीब परिवार के बच्चों को IAS/PCS और मेडिकल-इंजीनियरिंग की तैयारी कराने के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की शुरूआत की गई थी। साल 2022 में इसी योजना के तहत प्रत्य़ेक जिले में कोचिंग सेंटर शुर किए गए।कोचिंग सेंटर के लिए 69 कोर्स कोऑर्डिनेटर पदों पर भर्ती निकाली गई। योग्यता क तौर पर अभ्यर्थी का PCS मेंस परीक्षा पास होना अनिवार्य था।
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जेम पोर्टल के जरिए आउटसोर्सिंग पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई। जिसमें अवनी परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड को चयनित किया गया। ऑनलाइन आवेदन में कोर्स कोऑर्डिनेटर के लिए 8658 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। जिनमें से कुल 1998 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। फिर 69 लोगों की नियुक्ति की गई। हर कोर्स कोऑर्डिनेटर को 60,000 प्रतिमाह वेतन दिया गया। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण को मिले एक गोपनीय पत्र से इस पूरे फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ।
Avni Paridhi को मिले हर टेंडर के जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद Avni Paridhi के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। Avni Paridhi का कई जिलों और विभागों में काम चलता है। फर्जीवाड़े के बाद Avni Paridhi को मिले हर टेंडर के जांच की मांग की जा रही है। इधर अवनी परिधि के डायरेक्टर अज्ञात गुप्ता ने सारे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। अज्ञात गुप्ता का कहना है कि कंपनी का चयन प्रक्रिया में कोई सीधा रोल नहीं था और इंटरव्यू समाज कल्याण विभाग की समितियों ने लिया। बता दें कि Avni Paridhi का कई जिलों और विभागों में काम चलता है।
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