अशोक कुमार जायसवाल, वाराणसी. समाजवादी पार्टी के चंदौली से सांसद वीरेंद्र सिंह को रविवार को वाराणसी पुलिस ने मणिकर्णिका घाट जाने से रोक दिया. सांसद अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ घाट का निरीक्षण करने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें उनके आवास के बाहर ही रोक लिया. पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज सांसद वीरेंद्र सिंह अपने समर्थकों के साथ आवास के बाहर धरने पर बैठ गए. उन्होंने प्रशासन पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से घाट का निरीक्षण करना उनका संवैधानिक अधिकार है.

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सांसद वीरेंद्र सिंह ने बताया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें और अन्य नेताओं को एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में मणिकर्णिका घाट की स्थिति का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के लिए अधिकृत किया था. इसके बावजूद प्रशासन द्वारा उन्हें आगे बढ़ने से रोका जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर क्या छिपाना चाहती है. हम न तो किसी विरोध और न ही समर्थन के लिए जा रहे हैं. हम केवल यह देखना चाहते हैं कि श्मशान घाट पर मूलभूत सुविधाओं की स्थिति क्या है और महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा व उनके नाम से जुड़ा निर्माण कार्य मौजूद है या नहीं. अगर है, तो सरकार उसके संरक्षण के लिए क्या कर रही है.

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सांसद ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार पिछड़े और वंचित समाजों के योगदान को मिटाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर गडरिया समाज सहित कई समुदायों की प्रतिनिधि रही हैं, लेकिन सरकार उनके अस्तित्व और स्मृतियों को खत्म करना चाहती है. उन्होंने एनसीईआरटी की पुस्तकों से ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के नाम हटाए जाने का भी आरोप लगाया. धरने की सूचना मिलते ही मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया. प्रशासन और सांसद के बीच काफी देर तक बातचीत चली. इस दौरान सपा नेताओं ने मांग की कि कम से कम तीन सांसदों को निरीक्षण के लिए जाने दिया जाए, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका.