लखनऊ. उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पोस्टर वार शुरू हो गया है. सोमवार (21 सितंबर 2026) को लखनऊ समेत उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगाए गए. पोस्टरों में सपा सरकार के कार्यकाल की कानून-व्यवस्था और कथित माफिया राज को लेकर सवाल उठाए गए हैं.

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पोस्टरों में अतीक अहमद, आजम खान और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें प्रमुखता से लगाई गई हैं. इनमें लिखा है- ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ और ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’. इन नारों के जरिए सपा के शासनकाल को अपराध और बाहुबलियों के प्रभाव से जोड़कर निशाना बनाया गया है.

‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का नारा

पोस्टरों में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का स्लोगन भी इस्तेमाल किया गया है. रिपोर्टों के मुताबिक, पोस्टरों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए कथित माफिया और आपराधिक मामलों से जुड़े कई नामों की सूची दी गई है. इनमें अवध, पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड, ब्रज और रुहेलखंड क्षेत्र के नाम शामिल हैं.

कई जिलों में एक साथ लगाए गए पोस्टर

लखनऊ के अलावा उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत कई शहरों में पोस्टर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है. इससे चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था और कथित अपराधीकरण का मुद्दा फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आता दिख रहा है. हालांकि पोस्टर किस संगठन या व्यक्ति ने लगाए हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

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चुनाव से पहले बढ़ी सियासी बयानबाजी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और राजनीतिक दलों ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं. ऐसे में पोस्टर अभियान को सपा पर उसके पुराने शासनकाल के कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर हमला करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.