अमेरिका ने पाकिस्तान में बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए अपने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को लाहौर और कराची स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों से देश छोड़ने का आदेश दिया है. यह कदम बढ़ते सुरक्षा जोखिम की वजह से उठाया गया है. अमेरिका और ईरान के बीच हाल की सैन्य टकराव और तनाव के बाद पाकिस्तान में सुरक्षा हालात बिगड़ गए हैं. अमेरिकी मिशन ने कहा है कि ईरान से संभावित ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा जारी है, जिसके चलते वहां कार्यरत गैर-आपात स्टाफ की सुरक्षा सर्वोपरि नहीं मानी जा सकती.
ईरान में युद्ध के बाद पाकिस्तान में अमेरिकी कर्मचारियों पर खतरा बढ़ गया है. बीते रविवार को कराची में स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेट पर भीड़ ने हमल बोल दिया था, जिसके बाद US मरीन को फायरिंग करनी पड़ी थी.
अमेरिका ने पाकिस्तान में कराची और लाहौर के कांसुलेट्स से गैर-आपात स्टाफ और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है. सुरक्षा चिंताओं और हालिया तनाव के बीच यह कदम क्षेत्र में अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.
कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में अमेरिका के दूतावास और कांसुलेटों ने वीज़ा सेवाओं और नागरिक सेवाओं के लिए होने वाले अपॉइंटमेंट्स को रद्द या स्थगित कर दिया है. इन सेवाओं को कई शहरों में कम से कम 6 मार्च तक रोक दिया गया है. पेशावर में भी अमेरिका का कांसुलेट सुरक्षा चिंताओं के कारण अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है.
अमेरिका ने अपने नागरिकों को स्थानीय समाचारों और सुरक्षा अपडेट्स को लगातार देखने, बड़ी भीड़ से बचने, सुरक्षा उपाय अपनाने, और अपने Smart Traveler Enrollment Program (STEP) में रजिस्ट्रेशन बनाए रखने की सलाह दी है.
बता दें कि पिछले दिनों ईरान के खिलाफ संयुक्त अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद पाकिस्तान भर में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं और कुछ स्थानों पर दूतावासों पर हमला या तोड़फोड़ तक हुई है. इस वजह से भी सुरक्षा तनाव और बढ़ा है.
अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब, ओमान और साइप्रस में तैनात गैर-आपातकालीन कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने की इजाजत दे दी हैय यह फैसला ऐसे समय में किया गया है जब ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका के नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है.
रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब में कर्माचरियों के लिए ईरान से ड्रोन और मिसाइल हमलों का लगातार खतरा बताया गया है. इसमें कहा गया है कि अमेरिकी सरकार के पास देश में नागरिकों की मदद करने की सीमित क्षमता है. इसके साथ ओमान के लिए नोटिस में सुरक्षा खतरे का जिक्र किया गया है.
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