सुरेश परतागिरी, बीजापुर। जिला मुख्यालय के शांतिनगर स्थित बालक आश्रम में बन रही बाउंड्रीवाल को लेकर गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता के साथ खुलेआम समझौता किया जा रहा है, जिससे आश्रम में रह रहे बच्चों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
जानकारी के अनुसार बाउंड्रीवाल निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। सीमेंट और रेत का अनुपात मानकों के अनुरूप नहीं है, जिसके चलते दीवार कमजोर बन रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि निर्माण के बाद आवश्यक क्योरिंग (पानी डालकर मजबूती देना) की प्रक्रिया पूरी तरह नजरअंदाज की जा रही है। इसके परिणाम स्वरूप दीवार में शुरुआती स्तर पर ही दरारें दिखाई देने लगी हैं।


आश्रम अधीक्षक ने कैमरे के सामने खोली पोल
मामले ने तब तूल पकड़ा जब आश्रम अधीक्षक ने कैमरे के सामने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने स्पष्ट कहा, हमने कई बार निर्माण की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई और उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधीक्षक का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि मामला केवल तकनीकी खामी तक सीमित नहीं, बल्कि जिम्मेदारों की अनदेखी और संभावित मिलीभगत भी सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश, जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने भी निर्माण कार्य पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि आश्रम जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह का घटिया निर्माण बच्चों की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर खुलासे पर त्वरित कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। जिला मुख्यालय में ही निर्माण कार्यों की स्थिति ऐसी है तो अंदरूनी क्षेत्रो में गुणवता कैसी होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जिला मुख्यालय में ही ठेकेदारों के हौसले इस कदर बुलंद है कि खुलेआम गुणवत्ताहीन कार्यों काे अंजाम दिया जा रहा है।

