उत्तराखंड में जनगणना की शुरुआत चमोली जिले के माणा गांव से हुई, जहां 83 वर्षीय पूर्णिमा देवी से प्रक्रिया शुरू की गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर को मन की बात में माणा और पूर्णिमा देवी का उल्लेख किया.
चमोली. जिले में बदरीनाथ धाम के पास स्थित माणा गांव से जनगणना की शुरुआत हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 27 सितंबर को ‘मन की बात’ के 138वें संस्करण में इसका उल्लेख करते हुए बताया कि माणा में जनगणना की शुरुआत 83 वर्षीय पूर्णिमा रावत से हुई. प्रधानमंत्री ने माणा को देश का पहला गांव बताया.
पूर्णिमा देवी का उल्लेख
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद माणा की 83 वर्षीय पूर्णिमा देवी चर्चा में आ गईं. उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, जनगणना की शुरुआत उनके साथ की गई और उन्होंने इस प्रक्रिया में भागीदारी की.
माणा गांव में बुजुर्ग महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़ी हुई हैं. स्थानीय ग्राम प्रधान धर्मेंद्र चौहान के अनुसार, गांव की महिलाएं स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.
परिवार भी स्वरोजगार से जुड़ा
पूर्णिमा देवी के तीन बेटे हैं. स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, उनके बड़े बेटे केदार सिंह रावत आईटीबीपी से सेवानिवृत्त होने के बाद देहरादून में नौकरी कर रहे हैं, जबकि दूसरे बेटे नंदन सिंह ठेकेदारी से जुड़े हैं. तीसरे बेटे कुमेर सिंह रावत ट्रेकिंग संस्था का संचालन करते हैं.
माणा को देश का प्रथम गांव बताए जाने के बाद यहां के स्थानीय उत्पादों को भी पहचान मिली है. ग्राम प्रधान धर्मेंद्र चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उल्लेख से स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने की बात सामने आई है.
जनगणना को बताया राष्ट्रीय जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में जनगणना को सभी नागरिकों की राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया. उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के अलावा लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के दुर्गम तथा बर्फीले इलाकों में भी जनगणना का काम चल रहा है.
प्रधानमंत्री ने उत्तरकाशी के बगोरी गांव का भी उल्लेख किया, जहां होमस्टे संचालक हरदेव सिंह राणा ने डिजिटल माध्यम से खुद अपनी जानकारी दर्ज की. प्रधानमंत्री के अनुसार, जनगणना के पहले चरण में 32 करोड़ से अधिक परिवारों की जानकारी दर्ज की जा चुकी है.


