गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सरकारी जमीनों और संपत्तियों को निजी कंपनियों को सौंपने के फैसलों पर राज्यपाल से मुलाकात की. पार्टी ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज रद्द करने, यूआईआईडीबी के तीन टेंडर निरस्त करने और पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग की.

देहरादून. उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और धरोहर संपत्तियों को निजी कंपनियों को सौंपे जाने के मुद्दे पर कांग्रेस ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है. गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा. पार्टी ने संबंधित फैसलों को निरस्त करने और सरकारी संपत्तियों को उनके मूल विभागों को वापस लौटाने की मांग की.

संवैधानिक प्रावधानों का हवाला

राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में कांग्रेस ने संविधान के अनुच्छेद 154 और 166 का उल्लेख किया है. पार्टी का कहना है कि अनुच्छेद 154 के तहत राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित है, जबकि अनुच्छेद 166 के अनुसार राज्य सरकार की कार्यपालिका संबंधी कार्रवाई राज्यपाल के नाम से की जाती है.

कांग्रेस ने ज्ञापन में कहा कि सरकारी जमीनों और धरोहर भवनों को निजी हाथों में सौंपने से संबंधित शासनादेश भी राज्यपाल की स्वीकृति के नाम से जारी किए गए हैं. ऐसे में राज्य की इन संपत्तियों के संवैधानिक संरक्षक होने के नाते राज्यपाल को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए.

कैबिनेट के फैसले पर सवाल

प्रतिनिधिमंडल ने 20 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय से जुड़े शासनादेश पर भी आपत्ति जताई. कांग्रेस के मुताबिक, इस फैसले के तहत विभिन्न विभागों की सरकारी जमीनों के संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री को दे दिया गया था.

पार्टी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 164(2) में निर्धारित मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व और कार्य नियमावली के प्रावधानों के विपरीत बताया है.

जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज

कांग्रेस ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का मामला भी उठाया. पार्टी के अनुसार, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने करीब 142 एकड़ क्षेत्र में फैली इस जमीन और राष्ट्रीय धरोहर को लगभग एक करोड़ रुपये सालाना किराये पर 15 साल के लिए एक निजी कंपनी को सौंप दिया.

कांग्रेस ने दावा किया कि इस संपत्ति का बाजार मूल्य हजारों करोड़ रुपये है. पार्टी ने इसे कार्य नियमावली और उत्तराखंड में लागू अधिप्राप्ति नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन बताया है. प्रतिनिधिमंडल ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज तत्काल निरस्त करने की मांग की.

यूआईआईडीबी के टेंडर रद्द करने की मांग

ज्ञापन में कांग्रेस ने सरकारी जमीनों और संपत्तियों को उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) को सौंपने से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए. पार्टी का आरोप है कि इन संपत्तियों को बोर्ड को देने के निर्णय मुख्यमंत्री ने अकेले लिए.

कांग्रेस ने पटवा डांगर, नगऊ, धनोल्टी मगरा, आईडीपीएल ऋषिकेश, डाकपत्थर, रामगढ़ और एचएमटी रानीबाग की जमीनों का मुद्दा भी राज्यपाल के सामने रखा.

इसके अलावा, यूआईआईडीबी के तीन टेंडर तत्काल निरस्त करने की मांग की गई. इनमें पटवा डांगर, अलकनंदा होटल हरिद्वार और ऋषिकेश के निरीक्षण भवन से संबंधित टेंडर शामिल हैं.

अन्य मामलों का भी जिक्र

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले को भी उठाया. इसके साथ ही कोरोना काल में सहकारिता विभाग की भर्तियों में कथित घोटाले का मुद्दा भी राज्यपाल के समक्ष रखा.

कांग्रेस ने सरकारी जमीनों और संपत्तियों से जुड़े पूरे प्रकरण की उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है.