हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए वंदे मातरम गाने से मना करने वाली पार्षद रुबीना का चौतरफा विरोध हो रहा है। इस बीच उन्होंने एक बार फिर ऐसा विवादित बयान दिया है, जिससे उन पर राजनीतिक दलों का हमला तेज हो सकता है। दरअसल, उन्होंने हिन्दुस्तान को हिंदुओं से ज्यादा अपना बताते हुए कहा कि जमीन खोदने पर हमारे अवशेष मिलेंगे। इन्हें (हिंदुओं) तो गंगा में बहा देते हैं जो अरब सागर में मिलते हैं।

पार्षद रुबीना ने कहा, जन गण मन और अन्य सारे गीत हम गाते हैं। बस एक शब्द हम नहीं बोलते हैं, जिससे हमें दोजख की आग में डाला जाए। आजादी के पहले वंदे मातरम का नारा लगाने वालों को लेकर उन्होंने कहा कि हो सकता है उन्होंने हदीस नहीं पढ़ी हो, हमने तो पढ़ी है। जितना हक इनका नहीं है उससे अधिक इस मिटटी पर हक हमारा है। जब हम मरते हैं तो हमें हिन्दुस्तान की मिटटी में दफनाया जाता है। जब खोदोगे तो हमारे ही अवशेष मिलेंगे, इनके तो बहा दिए जाते हैं, गंगा में जो सीधे अरब सागर में जाते हैं। 

कांग्रेस के साथ न देने पर रुबीना इकबाल ने उनसे भी पल्ला झाड़ दिया। उन्होंने कहा कि मैं तो निर्दलीय जीती हूं। कांग्रेस भाड़ में जाए। हम इस्लाम को फॉलो करते हैं और इस्लाम में सिर्फ अल्लाह की इबादत करते हैं। वंदे का मतलब होता है, इबादत और मातरम का मतलब होता है धरती। एक अल्लाह की इबादत कर रहे है तो हम गुनाह का काम क्यों करे?

वंदे मातरम विवाद ने लिया सियासी रंग, महापौर ने किया पलटवार

 इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। एक तरफ कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के बयान ने विवाद खड़ा किया, तो अब महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस मुद्दे पर तीखा पलटवार किया है। वहीं कांग्रेस भी अब डैमेज कंट्रोल में नजर आ रही है।

 इंदौर नगर निगम परिषद के बजट सत्र में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव में बदल गया है। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के उस बयान से बवाल खड़ा हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि संविधान में वंदे मातरम गाना अनिवार्य नहीं है और इसे जबरदस्ती नहीं थोपा जा सकता। इस बयान के बाद सदन में जमकर हंगामा हुआ, बीजेपी पार्षदों ने वंदे मातरम के नारे लगाए और स्थिति को देखते हुए सभापति ने फौजिया शेख अलीम को एक दिन के लिए सदन से बाहर कर दिया।

अब इस पूरे मामले पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि संविधान में भले ही वंदे मातरम गाना अनिवार्य न हो, लेकिन इसका अपमान किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महापौर ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश सबसे बड़ा है, धर्म से ऊपर राष्ट्र है और देश की रक्षा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत माता का वंदन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और अगर किसी को इसमें आपत्ति है तो उसे यह तय करना चाहिए कि उसे इस देश में रहना है या नहीं।

वहीं विवाद बढ़ता देख कांग्रेस भी अब बैकफुट पर नजर आ रही है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने अपने ही पार्षद के बयान से किनारा कर लिया है। उन्होंने फौजिया शेख अलीम के बयान को व्यक्तिगत राय बताते हुए कहा कि पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम और जन गण मन इस देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इनका सम्मान किया जाना चाहिए।

चौकसे ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को दे दी गई है और आगे की कार्रवाई संगठन स्तर पर तय की जाएगी।इस पूरे विवाद ने अब राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है, जहां बीजेपी इसे राष्ट्र सम्मान का मुद्दा बना रही है, तो कांग्रेस इसे व्यक्तिगत बयान बताकर बचाव की कोशिश में जुटी है।

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