वाराणसी. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने चतुरंगिणी सेना का गठन कर लिया है. 27 सदस्यीय इस सेना के पदाधिकारियों की घोषणा कर दी गई है. ये सेना परशु (फरसा) के साथ पीले वस्त्र में होगी. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आदेश पर 10 महीने में ये सेना धरातल पर उतरेगी. 2 लाख 18 हजार 700 सेना बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है. इतना ही नहीं गौ रक्षा के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक नारा भी तैयार किया है. ये सेना रोको, टोको और ठोको के तर्ज पर कार्य करेगी. आगामी माघ मेले में ये सेना पूरी तरह तैयार हो जाएगी.
बता दें कि बीते 11 मार्च को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लखनऊ में घोषणा की थी वे जल्द ही चतुरंगिणी सेना का निर्माण करेंगे. अब सेना का गठन हो चुका है. लखनऊ में गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध के शंखनाद के दौरान ये घोषणा की थी. इस आयोजन में गो माता को राष्ट्रमाता या राज्य माता का दर्जा देने की मांग पर जोर दिया गया था. अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा था कि सनातन धर्म में जो 13 अखाड़े हैं ये अखाड़े शंकराचार्य की सेना होते हैं, लेकिन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि वह शंकराचार्य के साथ नहीं हैं मुख्यमंत्री के साथ हैं. इसलिए अब हम अपनी एक चतुरंगिणी सेना भी बनाएंगे. जिसमें साधु वैरागी और अन्य सभी संत होंगे.
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ब्राह्मणों के लिए कहा था कि ब्राह्मण सुख के लिए नहीं तपस्या के लिए है. ब्राह्मण के लिए सुख नहीं शुभ मांगा गया है. इसी देश में राजा परीक्षित हुए, दिग्विजय के लिए निकले थे. यह रोग है कि ‘मैं नहीं मानता उनको शंकराचार्य’. इसके लिए दिग्विजय करनी पड़ती है. शंकराचार्य सनातन की सुप्रीम कोर्ट हैं. मंडलेश्वर हाईकोर्ट हैं, साधु संत भी हमारे लोअर कोर्ट हैं. यहां भीड़ निर्णय नहीं करती है. यहां भीड़ का कोई अर्थ नहीं है, यह भेड़ तंत्र नहीं है. जिसको खुजली हो आ जाए सबको जवाब मिलेगा. कलियुग का यह स्वभाव है वह ब्राह्मण और गाय पर प्रहार करता है.
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