साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज खरीदने वाले ग्राहकों के लिए प्रोडक्ट के शाकाहारी या गैर-शाकाहारी मूल की पहचान आसान हो गई है। केंद्र सरकार ने Legal Metrology (Packaged Commodities) Fourth Amendment Rules, 2026 को 21 सितंबर 2026 को अधिसूचित किया है। इसके तहत संबंधित उत्पादों की पैकेजिंग पर वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन मूल बताने वाली रंगीन बिंदी का प्रावधान स्पष्ट किया गया है।
क्या होगा हरी और लाल-भूरी बिंदी का मतलब?
नियम के मुताबिक, हरी बिंदी वेजिटेरियन मूल वाले उत्पाद को दर्शाएगी, जबकि लाल या भूरी बिंदी नॉन-वेजिटेरियन मूल वाले उत्पाद के लिए होगी। यह चिन्ह पैकेज के Principal Display Panel के सबसे ऊपर लगाया जाना है।
किन प्रोडक्ट्स पर लागू होगा नियम?
यह प्रावधान साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, अन्य कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज पर लागू होता है। यानी इन रोजमर्रा के उत्पादों को खरीदते समय ग्राहक पैकेज के सामने वाले हिस्से पर यह संकेत देख सकेंगे।
क्या यह नियम पहली बार लागू हुआ है?
यहां एक जरूरी तथ्य है। वेज-नॉन-वेज डॉट की व्यवस्था पूरी तरह नई नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इसी तरह का प्रावधान 2014 में Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011 में जोड़ा गया था। सितंबर 2026 का संशोधन मुख्य रूप से इस प्रावधान को नियमों की नई संरचना में शामिल करता है और पुराने Rule 6(8) को हटा देता है।
ग्राहकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
हरी बिंदी का मतलब प्रोडक्ट की बेहतर गुणवत्ता, ज्यादा सुरक्षा या बेहतर असर नहीं है। यह केवल उसके वेजिटेरियन मूल की पहचान है। एलर्जी, त्वचा संबंधी जरूरतों या किसी खास सामग्री से बचने के लिए ग्राहकों को Ingredients List और अन्य जरूरी लेबल भी जरूर पढ़ने चाहिए। सरकार के इस संशोधन से पैकेजिंग पर उत्पाद के मूल की जानकारी को अधिक स्पष्ट रूप से देखने में मदद मिलेगी।
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