हकीमुद्दीन नासिर, महासमुंद. शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय महासमुंद के बालक छात्रावास से भूत-प्रेत की आवाज आने का विडियो वायरल हुआ है. वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि 112 की टीम छात्र छात्रावास में जाती है, लेकिन फिर छात्रावास के मेस के अंदर से आवाज आने लगी. जिसे सुनकर 112 की टीम भी हॉल के अंदर नहीं जा पाई. जिससे मेडिकल के छात्रों में दहशत है.

फिलहाल छात्रावास के सभी छात्र अपने-अपने घर गए हैं. वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए जब मीडिया उस छात्रावास में गई तो छात्रावास के कमरों में ताला लगा हुआ था. तीन गार्ड वहां मौजूद थे, लेकिन इस तरह के किसी घटना से गार्ड ने इनकार कर दिया. उसके बाद इस वायरल वीडियो के संदर्भ में जब शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के डीन से मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने भूत-प्रेत के किसी भी मामले से इंकार कर दिया.

डीन ने किया इंकार

वायरल वीडियो का खंडन करते हुए डीन ने कहा कि ऐसी शिकायत मुझे मिली तो मैनें एसपी को सूचना दे दी. सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो ऐसा कुछ भी नहीं मिला. बल्कि छात्रावास में टीवी और साउंड बॉक्स मिला. जिससे आवाज आना बताया जा रहा है. इस पर प्रबंधन का कहना है कि ये शरारती तत्वो की हरकत है. उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने पर जब जांच की गई, जिसके बाद मामले में कुछ शरारती तत्वों को पकड़ा गया था. वहीं इस पूरे मामले में एएसपी भी भूत-प्रेत के घटना से इंकार करते हुए शरारती तत्व का हाथ होने की बात कह रहे हैं.

मामले को लेकर अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि जानकारी मिली है कि पिछले दो दिनों से महासमुंद मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में भूत की अफवाह फैल रही है. जिसके भ्रम में छात्र हॉस्टल छोड़ कर घर जा रहे हैं. छात्रों को किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए और किसी भ्रम में नहीं आना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस वैज्ञानिक सदी में भूत प्रेत ग्रस्त होने की बात ही न केवल आश्चर्यजनक है, बल्कि हास्यास्पद भी है. भूत प्रेत जैसी मान्यताओं का कोई अस्तित्व नहीं होता. ये सिर्फ अंधविश्वास ही है. छत्तीसगढ़ ही नहीं दुनियाभर का चिकित्सा विभाग अपने कार्य के संचालन के लिये वैज्ञानिक तौर तरीकों का उपयोग करता आ रहा है. महाविद्यालय के बनाने और आधुनिकीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं. बीमारियों की जांच और उपचार के लिये कई सालों से अनेक उन्नत जैसी विधाओं का प्रयोग किया जाता है. वहीं स्पीकर, ब्लूटूथ, कम्प्यूटर, मोबाइल, व्हाट्सएप, जैसे वैज्ञानिक अविष्कारों से त्वरित काम करने में मदद मिलती है. जिसका छात्रों को लाभ उठाना चाहिए.

दिनेश मिश्र ने कहा अगर किसी की तथाकथित आवाज सुनने पर हॉस्टल में भूत होने का प्रचार होता है तो उसकी सही ढंग से जांच होनी चाहिए. बिना स्वर यंत्र की कोई आवाज नहीं होती, स्वरयंत्र प्राकृतिक रूप सभी मनुष्य और पशु में होता है. वहीं कृत्रिम रूप से मशीनों, लाउडस्पीकर, माइक से, मोबाइल से आवाज प्रसारित की जाती है. जिन्हें तुरंत या रिकॉर्ड कर के भी प्रसारित किया जाता है. रात के अंधेरे और सन्नाटे में लोग अनजान आवाजों से भयभीत हो जाते है जो डर का कारण और बाद में वही डर अफवाह का रूप ले लेता है.

ऐसी अफवाह अवैज्ञानिक और अंधविश्वास पूर्ण है. इसलिए पूरी जांच होनी चाहिए. ताकि छात्रों के मन के डर को दूर किया जा सके. मेडिकल छात्र तो वैसे भी हिम्मती और बहादुर माने जाते हैं. जो विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों में जनता की सेवा करते हैं. उनकी गाड़ियां कई बार एम्बुलेंस और आवश्यकता पड़ने पर मरीज ही नहीं बल्कि मृतक और उनके परिवार की भी मदद करती है. सुदूर अंचल में सुनसान जगहों पर भी लोग डॉक्टरों की मदद की आस रखते हैं. डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि भूत प्रेत जैसी मान्यताओं का कोई अस्तित्व नहीं होता जबकि इस अंधविश्वास के कारण छतीसगढ़ ही नहीं देशभर में हजारों लोग प्रतिवर्ष झाडफूंक, मारपीट, शारीरिक मानसिक प्रताड़ना के शिकार होते हैं. अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति अपनी निशुल्क सेवाएं इस सम्बंध में महाविद्यालय प्रशासन को देने और हॉस्टल आकर छात्रों से चर्चा कर समझाइश देगी.

देखिए वीडियो-