Vishvendra Singh Congress Statement: राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी नाराजगी एक बार फिर सामने आई है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह ने शुक्रवार सुबह फेसबुक पर एक लंबा पत्र लिखकर पार्टी के प्रदेश नेतृत्व, संगठन की कार्यशैली और वरिष्ठ नेताओं के सम्मान पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने 60 साल तक देश पर शासन किया, उसकी राजस्थान में आज कोई धणी-धोरी नहीं है और पार्टी राम भरोसे हो गई है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब उन्हें कांग्रेस की अनुशासन समिति की ओर से नोटिस जारी किए जाने का मामला चर्चा में है।

विश्वेंद्र सिंह बोले- नेता जिस डाल पर बैठे, उसी को काट रहे
विश्वेंद्र सिंह ने अपने पत्र में प्रदेश कांग्रेस के नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि पार्टी के नेता जिस डाल पर बैठे हैं, उसी को काट रहे हैं। उनके मुताबिक, स्वाभिमान के साथ काम करने वाले लोगों का अब पार्टी में दम घुट रहा है।
पूर्व मंत्री ने प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व से अहम और वहम की राजनीति छोड़ने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं हुआ तो पार्टी का बचा हुआ जनाधार भी प्रभावित हो सकता है।
विश्वेंद्र सिंह ने संगठन में वरिष्ठ नेताओं के सम्मान और युवाओं को मार्गदर्शन देने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी में वरिष्ठता का मान-सम्मान कम हो गया है। नारी शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए भी स्पष्ट सोच नजर नहीं आती। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से इन मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की।
चापलूसी नहीं करूंगा, अपने सिद्धांतों पर कायम रहूंगा
अपने पत्र में विश्वेंद्र सिंह ने सार्वजनिक जीवन में निभाई गई जिम्मेदारियों और अपने राजनीतिक सिद्धांतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विधायक, सांसद और मंत्री के रूप में उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे ईमानदारी और निष्ठा से निभाया।
उन्होंने दावा किया कि हमेशा सही का साथ दिया और जनता की आवाज को प्राथमिकता दी। अपने पूर्वजों की मान-मर्यादा और व्यक्तिगत स्वाभिमान को फैसलों का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि वफादारी की कीमत कई बार चुकानी पड़ी, लेकिन वे अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटे।
विश्वेंद्र सिंह ने साफ कहा कि वे चापलूसी नहीं करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि उनके दिल और घर के दरवाजे हमेशा उनके लिए खुले रहे हैं और आगे भी खुले रहेंगे। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन को भी बेदाग बताया।
राजनीतिक भविष्य का फैसला जनता पर छोड़ा
विश्वेंद्र सिंह ने पत्र के आखिर में कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें किसी से कोई अपेक्षा नहीं है। उन्होंने अपना जीवन जनता की सेवा में बिताने की बात कही और कहा कि उन्हें जनता का प्यार और स्नेह चाहिए।
अपने इष्ट गिरिराज महाराज के प्रति आस्था जताते हुए उन्होंने सत्य के मार्ग पर बने रहने की प्रार्थना की। साथ ही, उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला जनता पर छोड़ दिया।
विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि जनता का जो भी आदेश होगा, उसे वे स्वीकार करेंगे। उनके इस बयान से उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चा तेज हो सकती है, हालांकि उन्होंने इस पत्र में कांग्रेस छोड़ने का कोई स्पष्ट ऐलान नहीं किया है।
अनुशासन समिति के नोटिस के बीच आया बयान
विश्वेंद्र सिंह का यह पत्र ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस की अनुशासन समिति की ओर से उन्हें नोटिस जारी किए जाने का मामला चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, समिति ने 2 अक्टूबर को नोटिस जारी कर उन्हें सात दिन में जवाब देने का समय दिया था।
नोटिस की समय-सीमा पूरी होने के बीच आए इस बयान में विश्वेंद्र सिंह ने अपनी नाराजगी और संगठन से जुड़ी चिंताएं रखीं। हालांकि, उन्होंने पत्र में नोटिस के जवाब या किसी संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
इससे पहले भी विश्वेंद्र सिंह कांग्रेस की कार्यशैली और संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठा चुके हैं। निकाय चुनाव में पार्टी की हार के बाद उन्होंने टिकट वितरण और संगठन की भूमिका को लेकर भी नाराजगी जताई थी।
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