जुबैर अंसारी, सुपौल। जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल मंगलवार को चार्टर्ड प्लेन से सुपौल के वीरपुर पहुंचे और विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उनके साथ सुपौल के जिलाधिकारी सावन कुमार और सिंचाई सृजन के अभियंता प्रमुख, पटना भी मौजूद रहे।
अधिकारियों की टीम ने वीरपुर हवाई अड्डा, कोसी बैराज, कंट्रोल रूम, कोसी-मेची लिंक प्रोजेक्ट और अन्य योजनाओं का जायजा लिया। बताया जा रहा है कि पहली बार अभियंताओं और अधिकारियों की टीम चार्टर्ड प्लेन से वीरपुर पहुंचकर निरीक्षण करने आई।
निरीक्षण के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधान सचिव मल्ल ने कहा कि, यह अत्यंत महत्वाकांक्षी परियोजना प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना के तहत बिहार सरकार के साथ मिलकर संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि, करीब 6200 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली इस योजना का फेज-वन शुरू हो चुका है, जबकि फेज-टू में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया होगी। इसके लिए नेशनल वाटर डेवलपमेंट एजेंसी (NWDA) डीपीआर तैयार कर रही है।
उन्होंने बताया कि, फर्स्ट फेज में 41 किलोमीटर लंबी मौजूदा कोसी नहर को चौड़ा और गहरा किया जा रहा है तथा जमा गाद हटाई जा रही है। साथ ही लगभग 17 संरचनाओं- हेड रेगुलेटर, क्रॉस रेगुलेटर और साइफन का पुनर्निर्माण किया जाएगा। मल्ल ने कहा कि परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और मुख्यालय स्तर पर नियमित समीक्षा भी हो रही है।
स्थल निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि करीब 300–400 ट्रैक्टर, 60–70 पोकलेन मशीनें और लगभग 600–700 मजदूर काम में लगे हुए हैं। भींगाधार में डीसिल्टेशन का काम लगभग पूरा होने की स्थिति में है, जिसके बाद सेटलिंग बेसिन में काम शुरू किया जाएगा, जहां नहर करीब 400 मीटर चौड़ी होकर बहती है।
प्रधान सचिव ने सिल्ट के वैज्ञानिक निस्तारण को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि, इस पर विस्तृत चर्चा हुई है। डीएम सावन कुमार ने सुझाव दिया कि नो-मैन्स लैंड की 16–17 एकड़ लो-लाइन जमीन तथा बाईं कैनाल के किनारे खाली और गहरी जमीन को भराव के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर सहमति बनी है।
उन्होंने यह भी बताया कि, नेपाल क्षेत्र में कुछ अतिक्रमण की सूचना मिली है। इसे हटाने के लिए वहां के सीडीओ से समन्वय कर कार्रवाई की जाएगी ताकि परियोजना में कोई बाधा न आए। इसके अलावा कोसी बराज पर हाई-मास्ट लाइट लगाने और जर्जर पार्क के शीघ्र जीर्णोद्धार के निर्देश दिए गए हैं।
मल्ल ने कहा कि, कटैया पावर प्लांट की क्षमता बढ़ाने की भी संभावना है। भींगाधार चैनल के बेहतर संचालन के बाद नहर संचालन अवधि से अतिरिक्त समय में भी बिजली उत्पादन संभव हो सकेगा। इस संबंध में ऊर्जा विभाग से समन्वय किया जाएगा। उन्होंने अभियंताओं और एजेंसियों को निर्देश दिया कि मजदूरों और मशीनों की संख्या और बढ़ाई जाए तथा नए स्ट्रेच में काम तेज किया जाए। साथ ही सीपेज और भूगर्भ जल के कारण आ रही तकनीकी बाधाओं के समाधान पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।
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