Dharm Desk : ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का मनुष्य के जीवन से गहरा संबंध है। जन्मकुंडली में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु की स्थिति के आधार पर सुख, स्वास्थ्य, करियर और पारिवारिक जीवन का आकलन किया जाता है। ग्रहों के अनुकूल परिणाम के लिए पूजा-पाठ, मंत्र जाप, दान और रत्न धारण करने के साथ विशेष वनस्पतियों की जड़ें पहनने का उल्लेख मिलता है। हर ग्रह का संबंध किसी खास पौधे से जुड़ा हुआ है।
नवग्रहों के अनुसार अलग-अलग जड़ों का संबंध
1.सूर्य – बेल की जड़
2.चंद्रमा – खिरनी की जड़
3.मंगल – अनंतमूल की जड़
4.बुध – विधारा की जड़
5.गुरु – हल्दी की जड़
6.शुक्र – सरपोंखा की जड़
7.शनि – बिच्छू घास की जड़
8.राहु – चंदन की जड़
9.केतु – अश्वगंधा की जड़
ग्रहों के अनुसार जड़ धारण करने का महत्व
ज्योतिषीय गणना के हिसाब से प्रत्येक ग्रह का संबंध एक विशेष वनस्पति से होता है। इन जड़ों को निरघारित विधि से धारण करने का उद्देश्य संबंधित ग्रह के प्रतिकूल प्रभाव को कम करना और अनुकूल फल प्राप्त करना बताया जाता है। सूर्य की जड़ आत्मविश्वास और मान सम्मान से चंद्रमा की जड़ मानसिक शांति से, जबकि मगल की जड़ साहस और ऊर्जा से जोड़ कर देखी जाती है। इसी तरह बुध की जड़ बुद्धि और वाणी, गुरु की जड़ ज्ञान और समृद्धि तथा शुक्र की जड़ सुख-सुविधाओं से संबंधित मानी जाती है। शनि, राहु और केतु की जड़ों का संबंध जीवन में आने वाली बाधाओं और कठिनाइयों से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है।

जड़ धारण करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
प्रत्येक मनुष्य की कुंडली में ग्रहों की राशि और भाव अलग होते हैं। इसलिए किसी दूसरे मनुष्य के लिए अनुकूल जड़ आपके लिए भी शुभ रहेगी यह जरूरी नहीं है। जड़ पहनने से पहले ज्योतिषी से सलाह लेकर वनस्पति की सही पहचान और धारण करने की विधि समझना चाहिए। जड़ प्राप्त करते समय पौधे की सही पहचान का ध्यान रखना चाहिए। कई वनस्पतियों के स्थानीय नाम अलग-अलग क्षेत्रों में बदल जाते हैं। इसके अलावा जड़ को किस दिन, किस समय और किस प्रकार धारण करना है इसकी जानकारी भी पहले लेनी चाहिए। बिना जानकारी के किसी भी वनस्पति की जड़ धारण करने से बचना चाहिए।

