17 मई से अधिकमास शुरू, विवाह-मुंडन पर विराम लेकिन पूजा-पाठ और दान पुण्यदायी

17 मई से 15 जून तक अधिकमास रहेगा. इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है.

इस बार अधिकमास ज्येष्ठ माह में लगेगा, जिससे ज्येष्ठ महीना 60 दिनों का कहेगा. अधिकमास में मांगलिक कार्य नहीं होते.

अधिक मास में जरूरतमंद लोगों को अनाज, धन, जूते-चप्पल और कपड़ों का दान करना चाहिए.

गर्मी के साथ बीच-बीच में बारिश भी हो रही ऐसे समय में छाते का दान भी कर सकते हैं.

किसी मंदिर में शिव जी से जुड़ी चीजें जैसे चंदन, अबीर, गुलाल, हार-फूल, बिल्व पत्र, दूध, दही, घी, जनेऊ आदि का दान कर सकते हैं.

अधिक मास में भगवान विष्णु की विशेष पूजा करनी चाहिए. विष्णु पुराण, श्रीमद् भागवत पुराण, रामायण जैसे ग्रंथों का पाठ करना चाहिए.

साधु-संतों के प्रवचन सुनना चाहिए. अपने इष्टदेव के मंत्रों का जप करें. इन दिनों में गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करें.

नदी स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं. भगवान शिव का विशेष अभिषेक करें.

शिवलिंग पर चंदन का लेप करें. बिल्व पत्र, धतुरा, आंकड़े के फूल, दही, पंचामृत, शहद आदि चीजें अर्पित करें.

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