Jagannath Temple: यहां जानबूझकर फोड़े जाते हैं प्रसाद के घड़े, लेकिन भक्त चाहकर भी नहीं खा सकते

विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा अपने भीतर कई गहरे रहस्य और अनोखी परंपराएं समेटे हुए है.

इन्हीं में से एक बेहद हैरान करने वाली रस्म है, जिसमें मिट्टी के बड़े-बड़े मटकों को तोड़कर सारा प्रसाद जमीन पर बहा दिया जाता है.

आमतौर पर भगवान का प्रसाद भक्तों में बांटने के लिए होता है, लेकिन इस अनोखे प्रसाद को चखना तो दूर, छूने की भी मनाही है.

न तो कोई आम श्रद्धालु और न ही मंदिर के मुख्य पुजारी इस महाप्रसाद को ग्रहण कर सकते हैं.

जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान निभाई जाने वाली इस अनोखी और पवित्र रस्म को ‘अधर पना’ कहा जाता है

यह रथ यात्रा उत्सव का एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को निभाया जाता है.

इस रस्म के दौरान एक विशेष प्रकार का सुगंधित पेय यानी शरबत तैयार किया जाता है.

. यह शरबत दूध, ताजा पनीर, चीनी, पके केले, तुलसी दल, जायफल और दालचीनी जैसी पवित्र व स्वादिष्ट सामग्रियों को मिलाकर तैयार किया जाता है और यह सफेद रंग का होता है.

रथ यात्रा कईअदृश्य, सूक्ष्म और पारलौकिक शक्तियां भी भगवान के दर्शन के लिए आती हैं.

इसलिए, रथों पर मटके फोड़कर यह प्रसाद सीधे उन अदृश्य व पवित्र आत्माओं को तृप्त करने के लिए अर्पित किया जाता है.

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