आंध्र प्रदेश के इस रहस्यमयी जंगल में विराजते हैं भगवान नरसिंह के 9 रूप
आंध्र प्रदेश के इस रहस्यमयी जंगल में विराजते हैं भगवान नरसिंह के 9 रूप
ज्वाला नरसिंह-
यह मंदिर ऊपरी अहोबिलम की पहाड़ी पर स्थित है.
ज्वाला नरसिंह-
यह मंदिर ऊपरी अहोबिलम की पहाड़ी पर स्थित है.
अहोबिला नरसिंह-
यह इस क्षेत्र का सबसे प्राचीन और मुख्य मंदिर है.
अहोबिला नरसिंह-
यह इस क्षेत्र का सबसे प्राचीन और मुख्य मंदिर है.
मालोल नरसिंह-
यदि आप भगवान का शांत रूप देखना चाहते हैं, तो मालोल नरसिंह के दर्शन अवश्य करें.
मालोल नरसिंह-
यदि आप भगवान का शांत रूप देखना चाहते हैं, तो मालोल नरसिंह के दर्शन अवश्य करें.
क्रोड़ा नरसिंह-
यहां भगवान नरसिंह के साथ भगवान वराह का स्वरूप भी समाहित है.
क्रोड़ा नरसिंह-
यहां भगवान नरसिंह के साथ
भगवान वराह
का स्वरूप भी समाहित है.
करंज नरसिंह-
यह मंदिर एक विशाल 'करंज' वृक्ष के नीचे स्थित है.
करंज नरसिंह-
यह मंदिर एक विशाल 'करंज' वृक्ष के नीचे स्थित है.
भार्गव नरसिंह-
इस मंदिर का नाम भगवान परशुराम (भार्गव) के नाम पर पड़ा है.
भार्गव नरसिंह-
इस मंदिर का नाम भगवान परशुराम (भार्गव) के नाम पर पड़ा है.
योगानंद नरसिंह-
हिरण्यकश्यप के वध के बाद, जब भगवान का क्रोध शांत हुआ, तब उन्होंने प्रह्लाद को योग की शिक्षा दी.
योगानंद नरसिंह-
हिरण्यकश्यप के वध के बाद, जब भगवान का क्रोध शांत हुआ, तब उन्होंने प्रह्लाद को योग की शिक्षा दी.
छत्रवट नरसिंह-
पीपल के पेड़ (छत्रवट) के नीचे स्थित इस मंदिर का संबंध संगीत और कला से है.
छत्रवट नरसिंह-
पीपल के पेड़ (छत्रवट) के नीचे स्थित इस मंदिर का संबंध संगीत और कला से है.
पावन नरसिंह-
गरुड़ नदी के तट पर स्थित यह मंदिर नौ मंदिरों में सबसे कठिन मार्ग वाला माना जाता है.
पावन नरसिंह-
गरुड़ नदी के तट पर स्थित यह मंदिर नौ मंदिरों में सबसे कठिन मार्ग वाला माना जाता है.
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