कांवड़ यात्रा क्या है, क्या है इसका महत्व?

कांवड़ यात्रा का इंतजार हर साल लाखों शिव भक्त करते हैं.कांवड़ यात्रा 30 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगी.

कांवड़ यात्रा भगवान शिव की भक्ति से जुड़ी सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है.

शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है. उन्हें केवल एक लोटा जल चढ़ा कर प्रसन्न किया जा सकता है.

वहीं यह भी मान्यता है कि शिव बहुत जल्दी क्रोधित भी होते हैं.

कांवड़ यात्रा के दौरान मांस, मदिरा, तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए और न ही कांवड़ का अपमान (ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए) किया जाना चाहिए.

तो मध्य प्रदेश के इंदौर, देवास, शुजालपुर आदि जगहों से कांवड़ यात्री वहां की नदियों से जल लेकर उज्जैन में महादेव पर उसे चढ़ाते हैं.

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