अनशन से कब-कब हिली सरकार, जानें गांधी से लेकर वांगचुक तक का इतिहास

महात्मा गांधी ने भूख हड़ताल का इस्तेमाल सत्याग्रह के रूप में किया था. इससे यह बिना हिंसा के न्याय की मांग करने का एक नैतिक साधन बन गया.

1918 में उन्होंने अहमदाबाद मिल श्रमिकों की हड़ताल के दौरान कपड़ा श्रमिकों के लिए उचित वेतन की मांग करते हुए भूख हड़ताल की थी.

इस विरोध की वजह से अंत में मिल मालिकों को श्रमिकों की मांग माननी पड़ी.

1932 में गांधी ने ब्रिटिश सरकार के कम्युनल अवार्ड के खिलाफ यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू किया.

भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की जेल भूख हड़ताल स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने भारतीय राजनीतिक कैदियों के साथ समान व्यवहार की मांग के लिए लाहौर जेल में 116 दिनों की भूख हड़ताल शुरू की थी.

पोटी श्रीरामुलु का बलिदान आजादी के बाद स्वतंत्रता सेनानी पोटी श्रीरामुलु ने तेलुगु भाषी लोगों के लिए एक अलग राज्य की मांग करते हुए अनिश्चितकाल तक भूख हड़ताल शुरू की. दिसंबर 1952 में 58 दिनों की भूख हड़ताल के बाद उनकी मृत्यु हो गई.

अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन आधुनिक भारत में सबसे प्रभावशाली अनशन में से एक का नेतृत्व 2011 में अन्ना हजारे ने किया था.

सोनम वांगचुक को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग, पत्नी गीतांजलि ने लिखी चिट्ठी