आखिर आज भी क्यों अधूरी है जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियां, क्या है इसका रहस्य?

जगन्नाथ मंदिर अपने आप में कई रहस्यों को समेटे हुए हैं

इस मंदिर से जुड़ी जगन्नाथ यात्रा जितनी प्रसिद्द है उतनी ही इसमें मौजूद मूर्तियों की अनोखी आकृति भी है

इस मंदिर के भीतर जगन्नाथ जी के साथ बलभद्र और सुभद्रा जी की मूर्ति भी मौजूद है

इन मूर्तियों की खासियत यह है कि ये सभी मूर्तियां अधूरी हैं

मंदिर की सभी मूर्तियों को नीम की लकड़ी से तराशा गया है और एक रत्नों से जड़े चबूतरे पर स्थापित किया गया है

पौराणिक कथा के अनुसार, जब राजा इंद्रद्युम्न ने मंदिर बनवाया, तो भगवान विश्वकर्मा एक बूढ़े बढ़ई का रूप बदलकर मूर्ति बनाने आए

उन्होंने शर्त रखी कि वे 21 दिन तक बंद कमरे में मूर्ति बनाएंगे और कोई दरवाजा नहीं खोलेगा.

15 दिन बाद जब कमरे से कोई आवाज नहीं आई, तो रानी की चिंता बढ़ गई कि कहीं बढ़ई भूखे-प्यासे मर न गया हो

उनकी उत्सुकता और घबराहट के कारण समय से पहले दरवाजा खोल दिया गया.

दरवाजा खुलते ही भगवान विश्वकर्मा वहां से गायब हो गए और मूर्तियां अधूरी (हाथ और पैर के बिना) ही रह गईं

रथ यात्रा से पहले 15 दिन के लिए क्यों बंद होता है जगन्नाथ मंदिर?