रायपुर। संसदीय सचिव मामले में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा है कि हम हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हैं। क्योंकि ये आदेश छत्तीसगढ़ में चल रही तुष्टिकरण की राजनीति पर रोक लगाने वाला है। उन्होंने कहा कि संसदीय सचिव पद  संवैधानिक पद नहीं है।

भाजपा सरकार ने एक तरह से पंरपरा चला रखी थी। संसदीय सचिवों को यहां पर मंत्रियों की तरह सुविधाएं दी जा रही है, मंत्रियों की उपस्थिति में विधानसभा में उनके विभागों को जवाब वे देते हैं और तो और संसदीय सचिवों की नियुक्ति मुख्यमंत्री करते हैं। लिहाजा इस पद को तत्काल खत्म किया जाए।

संसदीय सचिवों पर सरकार करती है खर्च
छत्तीसगढ़ में संसदीय सचिव पद के लिए कोई प्रावधान नहीं है लेकिन यहाँ मध्यप्रदेश के कानून 1967 के आधार पर 11 संसदीय सचिव बनाए गए हैं। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में 11 संसदीय सचिवों पर अब तक 50 करोड़ का खर्चा हो चुका है।

  1. मासिक वेतन 73 हजार (11 अतिरिक्त भत्ता ) कुल खर्च 25 लाख
  2. मंत्रालय से अलग, डी और ई टाइप कमरे, मंत्रालय में अलग कमरा
  3. लग्जरी गाड़ी
  4. अलग ऑफिस और टेलीफोन
  5. सरकारी डीजल राजकोष से फ्री
  6. सुरक्षा के लिए 1 से चार गार्ड
  7. बंगले में 6 चौकीदार और दो रसोइयां

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अंबेश जांगड़े, संसदीय सचिव

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गोवर्धन मांझी, संसदीय सचिव

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चंपा देवी पावेल, संसदीय सचिव

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तोखन साहू, संसदीय सचिव

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मोतीराम चंद्रवंशी संसदीय सचिव

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राजू सिंह, क्षत्रीय

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रूप कुमारी चौधरी, संसदीय सचिव

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लखन देवांगन, संसदीय सचिव

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लाभचंद बाफना , संसदीय सचिव

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शिव शंकर पैकरा, संसदीय सचिव

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सुनीति राठिया, संसदीय सचिव

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ये हैं छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिव

  • मोतीराम चंद्रवंशी पंडरिया मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह
  • रूपकुमारी चौधरी बसना महिला, बाल विकास मंत्री रमशीला साहू
  • तोखन साहू लोरमी जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल
  • अंबेश जांगड़े पामगढ़ स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप
  • शिवशंकर पैकरा पत्थलगांव स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर
  • सुनीति राठिया लैलूंगा उद्योग मंत्री अमर अग्रवाल
  • लखन देवांगन कटघोरा खाद्यमंत्री पुन्नूलाल मोहिले
  • लाभचंद बाफना साजा गृहमंत्री राम सेवक पैकरा
  • राजूसिंह क्षत्रीय तखतपुर पीडब्लूडी मंत्री राजेश मूणत
  • गोवर्धन सिंह मांझी वृदानवागढ़ उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय
  • चंपादेवी पावले भरतपुर-सोनहत वन एवं विधि विधायी मंत्री महेश गागड़ा

आपको बदा दे कि छत्तीसगढ़ में संसदीय सचिवों को मंत्रियों की तरह बंगला, गाड़ी के साथ अन्य कई तरह की सुविधााएं या कहिए कि लाभ दिया जा रहा है। इसके साथ ही 11 मंत्रियों के साथ 11 संसदीय सचिव अटैच है। ऐसी स्थिति में देखना होगा कि 23 अगस्त को आने वाला अंतिम फैसला किसके हित में होगा।

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