सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 25000 शिक्षकों की बर्खास्तगी को बरकरार रखने का फैसला किया है. सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने आलोचना की है. उन्होंने इसे BJP की साजिश बताया है. CM ममता बनर्जी ने कहा एक नागरिक के तौर पर मैं कह रही हूं कि मैं इस फैसले का समर्थन नहीं कर सकती. उन्होंने इसे ‘घोर अन्याय’ करार देते हुए आरोप लगाया कि यह भाजपा द्वारा रची गई साजिश है. जिसका उद्देश्य इन शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी से रोकना है.

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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य संचालित और राज्य सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार दिया और पूरी चयन प्रक्रिया को “दूषित और कलंकित” बताया. सीजेआई संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने 22 अप्रैल, 2024 को कलकत्ता उच्च न्यायालय के नियुक्तियां रद्द करने के फैसले को बरकरार रखते हुए तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर नई चयन प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है.

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सीजेआई संजीव खन्ना ने यह भी कहा कि जिन कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई हैं, उन्हें अब तक प्राप्त वेतन और अन्य भत्ते वापस करने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने कुछ विकलांग कर्मचारियों के लिए मानवीय आधार पर छूट दी, कहा कि वे नौकरी में बने रहेंगे.

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साल 2016 में पश्चिम बंगाल एसएससी द्वारा आयोजित भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से उत्पन्न हुआ था, जिसमें 24,640 पदों के लिए 23 लाख उम्मीदवार उपस्थित हुए थे और कुल 25,753 नियुक्ति पत्र जारी किए गए थे उच्चतम न्यायालय ने इसे “प्रणालीगत धोखाधड़ी” करार दिया था.

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आपको बता दें कि, हाईकोर्ट ने उन लोगों को, जिन्हें आधिकारिक रूप से उपलब्ध 24,640 रिक्तियों के बाहर नियुक्त किया गया था, आधिकारिक तिथि की समाप्ति के बाद भर्ती किया गया था, और जिन्होंने खाली ओएमआर शीट जमा की थी लेकिन नियुक्तियां प्राप्त की थीं, को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ सभी वेतन और लाभ वापस करने का निर्देश दिया था.

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