Dharm Desk :- शारदीय नवरात्रि की महानवमी पर मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी। महानवमी 19 अक्टूबर, सोमवार को मनाई जाएगी। समय पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी । इस दिन कन्या पूजन, हवन और देवी आराधना के साथ दीपक जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है। इस दिन घर के अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाने से सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली आती है। मुख्य द्वार से लेकर तुलसी के पौधे तक दीपक जलाने के पीछे अलग-अलग धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं। आइए जानते हैं महानवमी पर घर की किन पांच जगहों पर दीपक जलाया जा सकता है और इनका क्या महत्व बताया जाता है।

मुख्य द्वार पर दीपक

घर के मुख्य द्वार को घर में प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, यहां शाम को दीपक जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि और घर में शुभता बनाए रखने की कामना की जाती है । दीपक घर के प्रवेश द्वार को रोशन करने का प्रतीक भी है।

तुलसी के पौधे के पास दीपक

हिंदू धर्म में तुलसी को पूजनीय माना गया है। तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा परिवार की सुख-शांति, खुशहाली और मंगलकामना से जुड़ी है । महानवमी की शाम तुलसी के पास दीपक जलाकर देवी मां का स्मरण कर सकते हैं।

रसोई में दीपक

रसोई का संबंध परिवार के भोजन और अन्न से है। धार्मिक भाव से यहां दीपक जलाकर घर में अन्न की पर्याप्तता और परिवार के सदस्यों के कल्याण की कामना की जाती है । इसे अन्न के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक तरीका भी माना जा सकता है।

तिजोरी के पास दीपक

धन रखने के स्थान पर दीपक जलाने की परंपरा मां लक्ष्मी की कृपा और आर्थिक खुशहाली की कामना से जुड़ी है । महानवमी पर तिजोरी या अलमारी के पास सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाकर परिवार की समृद्धि के लिए प्रार्थना की जा सकती है।

पीपल के पेड़ के नीचे दीपक

हिंदू धार्मिक परंपराओं में पीपल के पेड़ का विशेष महत्व है । इसके नीचे दीपक जलाकर पूजा और प्रार्थना करने की परंपरा भी प्रचलित है । महानवमी पर दीपक जलाते समय स्वच्छता और अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।