Dharm Desk – कार्तिक के पूरे महीने में पवित्र नदी में स्नान करने का अपना ही अलग महत्व पुराणों में बताया गया है।पंचांग परंपरा के अनुसार इस वर्ष कार्तिक मास 27 अक्टूबर से शुरू होकर 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के साथ संपन्न होगा। वहीं, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अमांत पंचांग के अनुसार यह 10 नवंबर से 8 दिसंबर तक रहेगा। इस दौरान स्नान के बाद भगवान विष्णु, सूर्य देव और तुलसी की पूजा का विधान है। वैष्णव परंपरा में यह महीना भगवान दामोदर यानी श्रीकृष्ण को समर्पित माना जाता हैं।

कार्तिक मास में पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ स्थल पर स्नान करना बहुत पुण्यदायी होता है। इससे मन को शांति और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है। इस महीने में सिर्फ पानी में डुबकी लगाना ही नहीं, बल्कि संयम रखना और सात्विक आहार अपनाना प्रतिदिन पूजा-पाठ करना और गरीबों को दान-पुण्य करना शामिल है।अगर आपका पूरे महीने सुबह स्नान करना संभव न हो, तो कार्तिक पूर्णिमा, एकादशी और अन्य शुभ पर्वों पर स्नान-पूजन करके भी पूरा फल प्राप्त कर सकते है।

कार्तिक स्नान किसके लिए खास?

1.कार्तिक स्नान के लिए किसी विशेष वर्ग, उम्र या लिंग की कोई सीमा नहीं है। महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार इस परंपरा का पालन कर सकते हैं।

2.घर पर पूजा का विकल्प
जो बुजुर्ग या श्रद्धालु किसी कारणवश नदी या तीर्थ स्थल तक जाने में असमर्थ हैं।वे घर पर ही जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।

3.भगवान का स्मरण
घर पर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का स्मरण दीपदान और तुलसी के पौधे के समक्ष दीपक प्रज्वलित करने से वही फल मिलता है जो तीर्थ स्नान से प्राप्त होता है।

कार्तिक स्नान के प्रमुख लाभ

  • ब्रम्हमुहूर्त में ठंडे जल से स्नान और ध्यान करने से तन और मन दोनों प्रफुल्लित रहते हैं।जिससे मानसिक शांति मिलती है।
  • कार्तिक के महीने में स्नान के बाद भगवान विष्णु, सूर्यदेव और तुलसी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
  • पौराणिक ग्रंथों के अनुसार कार्तिक मास में किया गया दान, जप और तप मनुष्य को पापों से मुक्त करके अच्छे लोक की प्राप्ति करवाते हैं।