Dharam Desk :- गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ दस दिवसीय गणेश उत्सव अब विदाई की ओर है । घरों और पंडालों में दस दिनों तक गणपति बप्पा की पूजा, आरती और भोग के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को पड़ रही है। विसर्जन से पहले उत्तर पूजा की जाती है, जिसके बाद बप्पा को श्रद्धा के साथ विदाई दी जाती है।

कब है गणपति विसर्जन?

पंचांग के अनुसार, में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है। चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11:18 बजे शुरू होकर 25 सितंबर की रात 11:6 बजे समाप्त होगी। इसी दिन गणपति विसर्जन किया जाएगा।

अनंत चतुर्दशी तिथि और मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी: 25 सितंबर, शुक्रवार
चतुर्दशी तिथि: 24 सितंबर रात 11:18 बजे से 25 सितंबर रात 11:06 बजे तक
पूजा का शुभ समय: सुबह 5:38 बजे से रात 11:06 बजे तक
पूजा अवधि: 17 घंटे 28 मिनट

उत्तर पूजा क्यों होती है

विसर्जन से पहले की जाने वाली पूजा को उत्तर पूजा कहा जाता है। दस दिनों तक गणपति की सेवा और आराधना के बाद इस पूजा के जरिए बप्पा को अंतिम बार पूजकर विदाई की तैयारी की जाती है। उत्तर पूजा के बाद प्रतिमा को उसके स्थान से थोड़ा आगे खिसकया जाता है । इसके बाद विसर्जन यात्रा शुरू की जाती है। सबसे पहले गणपति बप्पा को पंचामृत और शुद्ध जल से स्नान कराएं। फिर चंदन, अक्षत, सिंदूर, दूर्वा और फूल अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर मोदक, फल या घर में बना प्रसद भोग में रखें। गणेश मंत्रों का जाप करने के बाद आरती करे । यदि स्थापना के समय गौरी और कलश की पूजा की गई थी, तो उत्तर पूजा में उनका भी पूजन करें। अंत में पूजा के दौरान हुई भूल के लिए गणपति बप्पा से क्षमा मांगें।

गणपति विसर्जन की विधि

उत्तर पूजा और आरती पूरी होने के बाद गणेश प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं। रास्ते में गणपति बप्पा मोरया के जयकारे लगाते हुए बप्पा से परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखने और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करें। विसर्जन से पहले दोबरा आरती कर ले । इसके बाद प्रतिमा को श्रद्धा से जल में विसर्जित करें। फूल-माला, प्लास्टिक, कपड़े या अन्य ऐसी सजवटी सामग्री पहले ही अलग कर ले। जिन्हें पानी में डालना उचित नहीं है। इस तरह पूजा की परंपरा निभाते हुए गणपति बप्पा को सम्मान पूर्वक विदाई दी जा सकती।