Dharm Desk: दशहरा यानी विजयादशमी को धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक माना जाता है। ये दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध से से जुड़ा है। पुराने सयम में राजा और योद्धा युद्ध में इस्तेमाल होने वाले अस्त्र-शस्त्रों का पूजन करते थे। आज भी सेना, पुलिस और सुरक्षा से जुड़े कई लोग शस्त्रों की पूजा करते है। इसके अलावा किसान, कारीगर और दूसरे काम-काजी लोग अपने औजारों तथा कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का पूजन करते है।

दशहरे पर शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त

विजयादशमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन वियज मुहूर्त दोपहर 1.59 मिनट से 2.45 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में शस्त्र पूजा, अपराजिता पूजन और अन्य विजय संबंधी धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते है।

शस्त्र पूजा क्यों की जाती है

शस्त्र पूजा का संबंध शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा से है। धार्मिक परंपरा में शस्त्रों को अन्याय का सामना करने और अपनी रक्षा करने का साधन माना गया है। महभारत से जुड़ी मान्यता के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद अर्जुन ने शमी वृक्ष से अपने शस्त्र वापस लिए और युद्ध में उनका उपयोग किया। इसी प्रसंग को विजयादशमी पर शमी पूजन और शस्त्र पूजा की परंपरा से जोड़ा जाता है।

दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा का महत्व

विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा कई क्षेत्रों में की जाती है, इसे विजय, साहस और शुभ कार्यों से जोड़कर देखा जाता है। पूजा के दौरान वृक्ष को जल अर्पित करके रोली, अक्षत और पुष्प चढ़ाए जा सकते हैं। इसके बाद सुख-समृद्धि और कार्यों में सफलता की कामना की जाती है।

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