वैशाख माह में पड़ने वाली विकट संकष्टी चतुर्थी को लेकर इस साल भक्तों के बीच तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कई लोग 5 अप्रैल को व्रत रखने की बात कर रहे हैं, तो कुछ 6 अप्रैल को सही दिन मान रहे हैं. ऐसे में सही तिथि को लेकर स्पष्ट जानकारी होना जरूरी है.

पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल को सुबह 11:59 बजे से शुरू होकर 6 अप्रैल को दोपहर 2:10 बजे तक रहेगी. संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है. इस दिन चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है. यही कारण है कि यह व्रत उदयातिथि के बजाय चंद्र दर्शन के आधार पर रखा जाता है. इस स्थिति में विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 अप्रैल, रविवार को ही रखा जाएगा.
गणेश जी की पूजा और चंद्रमा को दिया जाता है अर्घ्य
इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को रखने से संतान से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं और वैवाहिक जीवन में आ रहा तनाव भी समाप्त होता है. साथ ही घर और व्यापार में आ रही बाधाएं भी खत्म होती हैं.
कई शुभ योग भी बना रहे
विकट संकष्टी चतुर्थी को संकटों को हरने वाला व्रत माना गया है. कहा जाता है कि सच्चे मन से गणेश जी की आराधना करने पर व्यक्ति को बल, बुद्धि, आरोग्य और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. इस बार इस तिथि पर विशाखा नक्षत्र के साथ वज्र योग और सिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और बढ़ गया है.
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