Dharm Desk : कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होती है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और आरोग्य के देवता भगवान धनवंतरी की पूजा करते है। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और नई वस्तुएं खरीदने के साथ झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है सनातन परम्परा में झाड़ू को केवल सफाई का साधन नहीं बल्कि माता लक्ष्मी का प्रतीक मानते है। घर की गंदगी और अव्यवस्था दूर करने वाली झाड़ू को समृद्धि और स्वच्छता से जोड़कर देखा जाता है।
इसी कारण धनतेरस के दिन नई झाड़ू खरीदना और उसका सम्मान करना शुभ होता है। इस परंपरा के पीछे भाव यह है कि घर में स्वच्छता शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहे। इसलिए धनतेरस पर झाड़ू खरीदने और उससे जुड़े कुछ विशेष उपाय करने चाहिए ऐसी मान्यता है कि विधिपूर्वक झाड़ू का पूजन और दान करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और दरिद्रता दूर हो जाती है।
धनतेरस पर दो झाड़ू खरीदने का धार्मिक विधान
धनतेरस के दिन बाजार से दो नई झाड़ू खरीदकर घर लाने की लोक परंपरा बताई जाती है।झाड़ू का संबंध घर की स्वच्छता के साथ माता लक्ष्मी के आगमन से भी जुड़ा हुआ होता है। जिस घर में साफ-सफाई और पवित्रता बनी रहती है वहां माता लक्ष्मी का वास होता है। इसी भाव से धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने को शुभ होता है।

दीपावली तक पूजा स्थल के पास रखें झाड़ू
पौराणिक विधान में धनतेरस पर खरीदी गई दोनों झाड़ू को घर के पूजा स्थल या मंदिर के पास साफ और सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। दीपावली तक इनका खास ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान श्रद्धापूर्वक इनका पूजन करने की परंपरा होती है। ऐसा करने से घर में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का संचार होता है।
दीपावली के बाद एक झाड़ू मंदिर में करें दान
इस उपाय का अगला विधान दीपावली का पर्व संपन्न होने के बाद किया जाता है। इसके विधान के अनुसार खरीदी गई दोनों झाड़ू में से एक झाड़ू किसी मंदिर में दान कर देनी चाहिए या मंदिर में अर्पित करनी चाहिए। दूसरी झाड़ू का उपयोग अपने घर की नियमित साफ-सफाई के लिए करना चाहिए। लोक विश्वास में झाड़ू का दान करने को दरिद्रता दूर करने और माता लक्ष्मी की का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

