Dharm Desk :- मंगलवार और शनिवार का दिन बजरंगबली की पूजा के लिए खास माना जाता है। इस दिन मंदिरों में भक्त बजरंगबली को सिंदूर, चमेली का तेल और बूंदी का भोग लगाते हैं। आपने भी कई बार देखा होगा कि हनुमान मंदिर में पूजा के बाद बूंदी का प्रसाद बांटा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हनुमानजी को बूंदी का ही भोग क्यों लगाया जाता है?
बूंदी का भोग लगाने के पीछे कई लोक परंपराएं जुड़ी हैं। इसे बजरंगबली को प्रिय प्रसाद में मानते है। खासकर मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाकर उनकी पूजा करने की परंपरा कई जगहों पर देखने को मिलती है।
बजरंगबली को क्यों चढ़ती हैं बूंदी?
शास्त्रीय परंपरा में बूंदी और बेसन से बने लड्डू का संबंध बजरंगबली की पूजा से जोड़ा जाता है। इनका सुनहरा या केसरिया रंग बजरंगबली के तेज, ऊर्जा और वीरता से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि भक्त पूजा के दौरान बूंदी का भोग लगाते हैं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। बजरंगबली को श्रद्धा से बूंदी का भोग लगाने और उनकी पूजा करने से भक्त को साहस और आत्मविश्वास मिलता है। संकट के समय मन को मजबूती मिलती है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति पाता है।
मंगलवार के व्रत में बूंदी का भोग
मंगलवार को हनुमानजी का व्रत रखने वाले भक्त पूजा के बाद उन्हें बूंदी का भोग लगाते हैं।धार्मिक विश्वास है कि हनुमानजी की आराधना से डर चिंता और जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।रोजाना पूजा से साहस, संयम और आत्मविश्वास बढ़ता है।

साढ़ेसाती में बजरंगबली की पूजा क्यों खास?
शनिवार के दिन बजरंगबली की पूजा का एक खास संबंध शनि देव से भी बताया है। लोकविश्वास के अनुसार बजरंगबली की भक्ति करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के बुरे प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है। इसी वजह से शनि से जुड़ी परेशानियों से राहत की कामना रखने वाले लोग शनिवार को बजरंगबली के मंदिर जाते हैं।
ऐसे में बजरंगबली को बूंदी का भोग लगाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना और श्रद्धा से पूजा करना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी क्षमता के अनुसार बूंदी बेसन के लड्डू या अन्य प्रसाद चढ़ सकते हैं।

