रायपुर- तारीख थी 31 अक्टूबर 1984, सरगुजा पैलेस में हर बार की तरह इस बार भी जन्मदिन की तैयारी हो रही थी. पैलेस को शाम होने वाले जश्न के लिए सजाया जा रहा था. लोग अपने महाराज के जन्मदिन के जश्न की खुमारी में डूबने आतुर थे. हर साल यह तस्वीर यूं ही सामने आती रही थी. महाराज का जन्मदिन किसी जलसे से कम नहीं होता था. चाहने वालों की भीड़ होती, दोस्तों का जमावड़ा होता, लेकिन इस दफे हालात को कुछ और ही मंजूर था, जिस उत्सव की तैयारियों में भी उल्लास नजर आता था, वहां हर किसी के चेहरे उदासी से भर उठे. यही वह दिन था, जब इस महाराज ने अपना जन्मदिन कभी न मनाने का फैसला लिया. तब से लेकर आज तक 36 साल बीत गए. जन्मदिन आते रहे, लेकिन जश्न कभी नहीं मना. दरअसल यही वह दिन था, जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी. देश में कांग्रेस और कांग्रेस से जुड़े तमाम नेता-कार्यकर्ता मायूस हो उठे थे. इन्हीं में एक चेहरा शामिल था, वह चेहरा थे टी एस सिंहदेव. 
 
टी एस सिंहदेव इन दिनों छत्तीसगढ़ सरकार के प्रभावशाली मंत्री हैं. जाहिर है मंत्री हैं, तो जन्मदिन को उत्सव सरीखे मनाने वालों की पूरी फौज होगी ही, लेकिन सिंहदेव इस बार भी हर बार की तरह अपना जन्मदिन नहीं मनाएंगे. उनके करीबी बताते हैं कि जन्मदिन के दिन ही इंदिरा गांधी की हुई हत्या की टीस आज भी सताती है. 
 
उस दौर को याद करते हुए सिंहदेव के करीबी बताते हैं कि 31 अक्टूबर 1984 को जन्मदिन की तैयारी चल रही थी कि ठीक 2 बजकर 23 मिनट पर इंदिरा गांधी की हत्या की खबर आ गई. जश्न का माहौल कब शोक में बदल गया यह कोई समझ ही नहीं पाया. टी एस सिंहदेव का कांग्रेस की विचारधारा को आधार बनाकर राजनीतिक सफर शुरू ही हुआ था, ऐसे में इंदिरा गांधी का जाना उनके लिए व्यक्तिगत तौर पर गहरा आघात करने जैसा रहा. उन्होंने उस दिन की यह तय कर लिया था कि वह कभी जन्मदिन पर जश्न नहीं मनाएंगे.
 
 
टी एस सिंहदेव को जानने वाले यह भी बताते हैं कि वह अक्सर इंदिरा गांधी की हत्या के ठीक एक दिन पहले भुवनेश्वर में दिए गए उनके आखिरी भाषण का जिक्र करते हैं, जिसमें इंदिरा गांधी ने कहा था कि  ‘मैं आज यहाँ हूँ. कल शायद यहाँ न रहूँ. मुझे चिंता नहीं मैं रहूं या न रहूं. मेरा लंबा जीवन रहा है और मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने लोगों की सेवा में बिताया है. मैं अपनी आख़िरी सांस तक ऐसा करती रहूंगी और जब मैं मरूंगी तो मेरे ख़ून का एक-एक क़तरा भारत को मज़बूत करने में लगेगा’ 
 
सरगुजा पैलेस से जुड़े जानकार कहते हैं कि सिंहदेव उस वाक्या का भी संदर्भ अक्सर दिया करते हैं, जिसमें खुफिया एजेंसियों ने आपरेशन ब्लू स्टार के बाद इंदिरा गांधी की हत्या की आशंका जताते हुए सिफारिश की थी कि उनके सुरक्षा घेरे से सिख सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया जाए, लेकिन जब यह फाइल इंदिरा गांधी तक पहुंची, तब उन्होंने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए अपने मातहत अधिकारियों से पूछा कि क्या हम धर्मनिरपेक्ष नहीं है? सिंहदेव ने कई मौकों पर यह कहा है कि इंदिरा गांधी की यही सोच उन्हें एक आदर्श राजनेता के रूप में स्थापित करती है.