Dharm Desk: दिवाली पर देशभर में मां लक्ष्मी की पूजा की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में मां लक्ष्मी की पूजा का तरीका काफी अलग और खास है। यहां मां लक्ष्मी की प्रतिमा के साथ उनके वाहन उल्लू को भी विशेष स्थान दिया जाता है। बंगाल में उल्लू को लक्ष्मी का अभिन्न प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि मां लक्ष्मी की प्रतिमा में उनके साथ उल्लू जरूर दिखाई देता है। बंगाल की लक्ष्मी पूजा में घरों के फर्श पर अल्पना बनाई जाती है, जिसमें देवी के चरण चिह्न उकेरे जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि मां लक्ष्मी ने उल्लू को ही अपना वाहन क्यों चुना और बंगाल में इस पक्षी को इतना धार्मिक महत्व क्यों दिया जाता है?

बंगाल में उल्लू के बिना अधूरी मानी जाती है लक्ष्मी की प्रतिमा

पश्चिम बंगाल में मां लक्ष्मी को उल्लू पर विराजमान दिखाने की परंपरा काफी पुरानी है। यहां उल्लू को बांग्ला भाषा में ‘लक्ष्मी पेचा’ कहा जाता है। बंगाल की पारंपरिक लक्ष्मी प्रतिमाओं में सफेद उल्लू को देवी के साथ दर्शाया जाता है।

मां लक्ष्मी का वाहन उल्लू को ही क्यों बनाया

इससे जुड़ी एक प्रचलित व्याख्या उल्लू की विशेषता से जुड़ी है। उल्लू रात के अंधेरे में भी देख सकता है। इसे सतर्कता और विवेक का प्रतीक माना जाता है। इसके माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि धन-संपत्ति आने पर भी व्यक्ति को अपनी बुद्धि और समझदारी नहीं खोनी चाहिए।

बंगाल की लोक परंपरा में उल्लू को मां लक्ष्मी के साथ जोड़कर देखने के पीछे एक और अर्थ बताया जाता है। जिस तरह उल्लू अंधेरे में भी अपना रास्ता खोज लेता है, उसी तरह मां लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति कठिन परिस्थितियों से बाहर निकल सकता है।

कैसे होती है बंगाल में मां लक्ष्मी की पूजा

बंगाल में मां लक्ष्मी की सबसे प्रमुख पूजा कोजागरी पूर्णिमा पर होती है। इसे दुर्गा पूजा के कुछ दिनों बाद आश्विन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन घरों की सफाई कर पूजा स्थल सजाया जाता है। महिलाएं घर के आंगन और प्रवेश द्वार पर चावल के घोल से सफेद अल्पना बनाती हैं। इसमें मां लक्ष्मी के छोटे-छोटे पैरों के निशान भी बनाए जाते हैं, जो देवी के घर में प्रवेश का प्रतीक हैं।

पूजा में धान, चिउड़ा, मुरमुरे, फल, नारियल और घर में बनी मिठाइयां चढ़ाई जाती हैं। कई परिवार लक्ष्मी पंचाली का पाठ करते हैं, देर रात तक जागकर मां की आराधना करते हैं।

दिवाली पर बंगाल में किसकी होती है पूजा

8 नवंबर को दिवाली के दिन पश्चिम बंगाल में मुख्य रूप से मां काली की पूजा होती है । इसे श्यामा पूजा या काली पूजा भी कहा जाता है। इस रात मंदिरों और पंडालों में मां काली की विशेष पूजा होती है। हालांकि कुछ बंगाली परिवार अपनी परंपरा के अनुसार दीपान्विता लक्ष्मी पूजा भी करते हैं।

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