दिल्ली के 2020 सांप्रदायिक दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में सुप्रीम कोर्ट 5 जनवरी को उमर खालिद, शरजील इमाम समेत सात आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा. यह निर्णय जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ देगी. शीर्ष अदालत ने 10 दिसंबर को इन आरोपियों की अलग-अलग जमानत याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलीलें पेश कीं, जबकि आरोपियों की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंहवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा ने पक्ष रखा। आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद के अलावा मीरान हैदर, गुल्फिशा फातिमा, शिफा उर रहमान, मुहम्मद शकील खान और शादाब अहमद की जमानत याचिका पर भी 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा.
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत तथा तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली में साल 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगे के मामले में आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम समेत सात आरोपियों की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार 5 जनवरी को अपना फैसला सुनाएगा.
बताते चले कि कुछ दिन पहले ही न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी की ओर से उमर खालिद को लिखे एक पत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. भारतीय जनता पार्टी ने ममदानी पर भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया है. ममदानी ने जेल में बंद उमर खालिद के नाम एक पत्र लिखा है. यह चिट्ठी उमर खालिद की साथी बानो ज्योत्सना लाहिरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सवाल उठाया कि न्यूयॉर्क के मेयर को भारत के लोकतंत्र और न्यायपालिका पर टिप्पणी करने का क्या अधिकार है.
दिल्ली पुलिस का आरोप है कि ये आरोपी फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के कथित मास्टरमाइंड थे। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ हो रहे व्यापक प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। आरोपियों ने 2 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
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