हेमंत शर्मा, इंदौर। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है… पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इन पंक्तियों को इंदौर के दो दिव्यांग भाई-बहन संध्या और वीरेंद्र सच साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों के सपने बड़े हैं। कोई डॉक्टर बनना चाहता है तो कोई इंजीनियर और कलेक्टर बनने का सपना देख रहा है। पढ़ाई में अच्छे नंबर भी हासिल किए हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति उनके सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। स्कूल की फीस भरने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग तक के पैसे नहीं हैं। इसी उम्मीद के साथ दोनों भाई-बहन मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे।

बच्चों ने कहा- हम पढ़ना चाहते हैं, लेकिन फीस भरने के पैसे नहीं हैं


जनसुनवाई में जब दोनों बच्चों ने कलेक्टर शिवम वर्मा के सामने अपनी बात रखी तो उन्होंने अपनी पढ़ाई, परीक्षा में मिले अच्छे नंबर और आगे पढ़ने की इच्छा बताई। परिजनों ने भी बताया कि बच्चे पढ़ाई में अच्छे हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनकी पढ़ाई जारी रखने में मुश्किल आ रही है। स्कूल की फीस और कोचिंग का खर्च उठाना परिवार के लिए संभव नहीं हो पा रहा है।

कलेक्टर ने कहा- तुम सिर्फ पढ़ाई करो, बाकी चिंता हमारी है

दोनों बच्चों की बात सुनने के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी पढ़ाई में आर्थिक परेशानी बाधा नहीं बनेगी। कलेक्टर ने बच्चों से कहा- आप सिर्फ मन लगाकर पढ़ाई करो, बाकी चिंता हम पर छोड़ दो। आपकी पढ़ाई और आगे की तैयारी की जिम्मेदारी अब प्रशासन उठाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों बच्चे खूब पढ़ें, अपने सपनों को पूरा करें और डॉक्टर, इंजीनियर और कलेक्टर बनकर दिखाएं।

कलेक्टर ने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि उनकी मेहनत, लगन और संघर्ष दूसरे दिव्यांग बच्चों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं। उनके प्रयासों से दूसरे बच्चों को भी आगे बढ़ने की हिम्मत मिलेगी।

जनसुनवाई में सामने आई उम्मीद की तस्वीर

आमतौर पर जनसुनवाई में लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें लेकर पहुंचते हैं, लेकिन इस बार इंदौर में जनसुनवाई की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने उम्मीद जगाई है। यहां दो बच्चे मदद मांगने जरूर पहुंचे थे, लेकिन उनके पास सपने किसी भी आम बच्चे से छोटे नहीं थे। शारीरिक चुनौतियां और आर्थिक परेशानियां उनके हौसलों को कमजोर नहीं कर पाई हैं।

अब जिला प्रशासन इन दोनों बच्चों की आगे की पढ़ाई और तैयारी में मदद करेगा। कलेक्टर के इस भरोसे ने संध्या और वीरेंद्र के सपनों को नई उम्मीद दी है। एक छठवीं तो दूसरी दसवीं कक्षा का छात्र है।

क्योंकि किसी बच्चे को आगे बढ़ने के लिए सिर्फ प्रतिभा और मेहनत ही नहीं, कभी-कभी एक ऐसे हाथ की भी जरूरत होती है, जो मुश्किल वक्त में उसका साथ थाम ले। इंदौर की इस जनसुनवाई में दो बच्चों को ऐसा ही भरोसा मिला है।

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